टीम एबीएन, रांची। ब्रह्माकुमारी संस्थान, चौधरी बगान हरमू रोड में नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के पूर्व संस्था अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अपने विचार अभिव्यक्त करते हुए केन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाने के पीछे का उद्देश्य लोगों को नशे की बुरी आदत से छुटकारा दिलाना तथा उन्हें नशे से होने वाले दुष्पभाव से बचाना है। इसके लिए जागरूकता बहुत आवश्यक है। जागरूकता ही नशामुक्ति का सबसे बड़ा इलाज है।
डॉ सुबोध नेत्र रोग विशेषज्ञ ने कहा कि भारत में बहुत से लोग किसी न किसी रूप में शराब या मदिरा का सेवन करते हैं। अधिकतर लोगों में यह अंधविश्वास है कि थोड़ी सी मात्रा में रोजाना उच्च स्तर की शराब पीने से स्वास्थ्य ठीक रहता है। वास्तव में इस तरह की भ्रांत व्याख्याओं का उदय, भारत जैसे पवित्र आध्यात्मिक देश में, पश्चिमी देशों के कारण हुआ है।
पश्चिमी देशों के वातावरण, रहन सहन तथा जलवायु के आधार पर वहाँ लगभग प्रत्येक भोजन के पहले या साथ में शराब का सेवन किया जाता है। इसी आधार पर कुछ लेखकों तथा शोधकतार्ओं ने विचारों अनुसार सूक्ष्म और निश्चित मात्रा में वाइन पीने से हृदय की कोरोनरी धमनियों में चर्बी युक्त रसायन (कोलेस्ट्रोल) नही जमता। जो इस कारण हृदय रोग कम होते हैं। वास्तव में भारत वर्ष की जलवायु, भौगोलिक परिस्थितियों तथा वातावरण इस प्रदूषित धारणा की अनुमति नहीं देते हैं।
मंजुला केंडिया पूर्व अध्यक्षा महिला समिति अग्रवाल सभा ने कहा आज के समय में अधिकतर मानव, जटिल कठिनाइयाँ, तनाव एवं परेशानियों आदि से पीड़ित होने के कारण नशे का सहारा लेकर शांति को जीवन भर तलाशते हैं और सुविधाएँ में शराब या नशे को अपनी समस्याओं एवं परेशानियों का अस्थायी हल अनुभव करने लगते हैं। अब तनावरहित जीवन जीने की प्रबल इच्छा के कारण व्यसनी शराब को निरंतर प्रयोग करते रहने से उसकी स्थाई उपचार ही समझ लेता है और सदा शराब या नशे को त्यागने में असमर्थता व्यक्त करता है।
श्रीकृष्ण प्रणामी सेवाधाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा वास्तव में अधिक और निरंतर शराब पीने का असर प्रारंभ में शरीर के प्रमुख अंगों पर कम दिखता है। इसका कारण है - शारीरिक अंगों विशिष्ट संरचना तथा उनमें भरपूर सहनशक्ति का होना। परन्तु अधिक समय शराब का सेवन करने से इन अंगों का वह विशिष्ट गुण क्षीण हो जाता है जिससे कई प्रकार के उसके जीवन में मुश्किल उत्पन्न होता है।
अग्रवाल सभा के उपमंत्री निर्मल बुधिया ने कहा आजकल लोग अच्छी निद्रा लाने के लिए भ्रम में शराब का अधिक से अधिक सेवन करते हैं और अंत में शारीरिक दुर्बलता, बीमारी आदि कारण उन्हें निद्रा भी नहीं आती। क्योंकि शरीर शराब का हो जाता है। व्यसनी सफलता के लिए भ्रम में शराब के साथ नींद की गोलियों का सेवन शुरू कर देता है और अंत में दुखी एवं असहाय होकर मृत्यु की आईने के मुंह देखने को तैयार हो जाता है। यदि व्यसनी अधिक समय तक व्यसनों को इसी प्रकार प्रयोग करता रहता है तो बीमारी से पीड़ित हो जाता है और अपनी स्मृति तथा कार्यो पर नियन्त्रण वो डालता है एवं पागलपन की स्थिति में पहुँच जाता है।
अग्रवाल सभा के कार्यकारिणी सदस्य नरेश कुमार बंका ने कहा जिस प्रकार नींबू की रस की दो बूंदे उबलते हुए दूध का चिट्ठड़े-चिट्ठड़े कर देती है उसी प्रकार शराब रूपी विष की कुछ ही बूंदें मनुष्य के मन की शांति, बुद्धि की तीक्ष्णता तथा शरीर के आकार को क्षीण कर डालती है।
अमरेंद्र विष्णुपुरी, समाजसेवी ने कहा शराब से मुक्ति के लिए शराब के व्यसन में जकड़ा हुआ मानव यदि परमप्रिय परमपिता परमात्मा निराकार शिव भोलेनाथ बाबा की याद में भोजन को ग्रहण करें तथा निरंतर नित्य सकारात्मक एवं शुभ चिंतन करें तो निश्चय ही इस नर्क से छुटकारा मिल सकता है। एक ही नहीं अपितु हजारों की संस्था लोग प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के द्वारा सिखाये जा रहे सहज राजयोग अभ्यास से व्यसनों से मुक्त हो चुके हैं।
इस अवसर पर सभी ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ प्रतिज्ञा ली। ज्ञातव्य हो कि ब्रह्माकुमारियों संस्था चौधरी बगान हरमू रोड में प्रतिदिन प्रात: 7 से 10 बजे तक एवं संध्या 4 बजे से 6.30 बजे तक राजयोग का प्रशिक्षण नि:शुल्क उपलब्ध है। उक्त जानकारी प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की केन्द्र प्रशासिका ब्रह्माकुमारी निर्मला ने दी।