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झारखंड

सिविल सर्जन सभागार रांची में मादक पदार्थों से बचने को लेकर जागरूकता कार्यक्रम

सिविल सर्जन सभागार रांची में मादक पदार्थों से बचने को लेकर जागरूकता कार्यक्रम
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टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 09.06.2025 को सिविल सर्जन कार्यालय सभागार में निषिद्ध मादक पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने हेतु चार दिवसीय जिला स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम सह प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रांची जिला अंतर्गत सभी प्रखंड से चार-चार मेडिकल आफिसर के साथ 10 स्वास्थ्य कर्मी ने प्रतिभागी के रूप में भाग लिया। 

कार्यक्रम में राज्य स्तरीय नारकोटीक कंट्रोल ब्यूरो से प्रशिक्षण प्राप्त मास्टर ट्रेनर प्रवीण सिंह, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, रांची एवं सुशांत कुमार, जिला कंसलटेंट टोबैको कंट्रोल सेल, रांची  एवं नीरज कौशिक समन्वयक रांची कैंसर केयर फाउंडेशन ने यह प्रशिक्षण दिया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य मादक पदार्थों के सेवन को खत्म करना है। 

जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रवीण सिंह ने कहा कि मादक पदार्थ एवं ड्रग्स हमारे तंत्रिका तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं और इसका हमारे स्वास्थ्य पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। आज स्कूल कॉलेज में युवाओं को उनके सहपाठी सहकर्मियों के द्वारा ड्रग्स लेने के लिए उकसाया जाता है। कुछ लोग अवसाद चिंता और अत्यधिक तनाव के कारण इसका सेवन शुरू कर देते हैं वहीं कई लोग पढ़ाई नौकरियां व्यापार में दबाव के कारण बहुत ही कम उम्र में नशीली दवाई एवं ड्रग्स का सेवन शुरू कर देते हैं। 

इनका सेवन करने से हमारे शरीर पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही कई तरह के स्वास्थ्य समस्या उत्पन्न होती है। शरीर में संक्रमण, वजन में कमी, हृदय विकार, लिवर संबंधी समस्या फेफड़े कैंसर इत्यादि रोगों का एक मुख्य कारण ड्रग्स एवं नशीली पदार्थ का सेवन करना है। कई ड्रग्स खासकर कोकेन इत्यादि दिल के दौर और स्ट्रोक सहित कई गंभीर हृदय संबंधी समस्या पैदा कर सकते हैं। 

शराब पीने और ड्रग लेने से लीवर सिरोसिस और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियां हो सकती है एवं यकृत और गुर्दे भी खराब हो सकते हैं। कई बार इसके सेवन लगातार सेवन से लोगों की असमय मृत्यु भी हो जाती है। वहीं दूसरी ओर घर में पारिवारिक कलह, अलगाव घरेलू हिंसा, तलाक तथा रोजगार हानि, प्रतिष्ठा की हानि इत्यादि भी होती है। लोगों को वित्तीय संकट भी झेलना पड़ता है। 

हमें इसके सेवन को पूर्णता त्यागना चाहिए। यदि किसी को नशा या ड्रग्स अथवा नशीले पदार्थ की लत है तो धीरे-धीरे करके इसे छोड़ना चाहिए। इसके लिए हमें ऐसे दोस्तों के साथ रहना चाहिए जो नशे का सेवन नहीं करता हो। व्यायाम, संगीत सुनने, खेलकूद जैसे अपनी पसंदीदा गतिविधियों में खुद को व्यस्त रखना चाहिए। अपने जीवन शैली में बदलाव करके हम नशे से दूर रह सकते हैं। 

सुशांत कुमार ने बताया कि आज सबसे ज्यादा युवा वर्ग नशीले पदार्थ जैसे ड्रग्स, ककेन और तंबाकू इत्यादि का सेवन करते हैं। लंबे समय तक नशीली दवाओं का सेवन करने से गंभीर अवसाद चिंता और अन्य मनोदशा संबंधी विकार हो सकता है। इसके ज्यादा सेवन से लोगों में बेचैनी है लगती है और साथ में भूख की कमी भी हो जाती है नशीली दावों के लगातार प्रयोग से लोगों की समझ और ज्ञान प्रभावित हो जाती है।

साथ ही उनका मेमोरी पावर भी काम हो जाता है और निर्णय लेने और सीखने की क्षमता भी खराब हो जाती है। युवा वर्ग को नशे की चपेट से बचने के लिए उनके माता-पिता को उनके साथ समय बिताना चाहिए और उनकी देखभाल करनी चाहिए साथ ही बच्चों की गतिविधि और उनके दोस्तों में रुचि दिखानी चाहिए ताकि वह हर चीज उनके साथ शेयर कर सके।

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