विनय चौबे शराब घोटाला प्रकरण का सीबीआई जांच हो : देवेंद्रनाथ महतो
टीम एबीएन, रांची। पत्र के माध्यम से जेएलकेएम नेता देवेन्द्र नाथ महतो ने मुख्यमंत्री को ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैं कि झारखंड में बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच एक अहम मोड़ पर पहुंच गयी है। गिरफ्तार आईएएस विनय कुमार चौबे और गजेन्द्र सिंह दोनों पर सरकारी पद का दुरूपयोग कर प्लेसमेंट एजेंसियों और शराब सप्लाई कंपनियों के चयन में नियमों को दरकिनार करने का आरोप है।
वर्ष 2022 में जब विनय चौबे झारखंड में उत्पाद सचिव थे, तब राज्य में नयी शराब नीति बनायी गयी थी, जिसमें अंदेशा है कि जिसमें छत्तीसगढ़ के कुख्यात शराब सिंडिकेट में शामिल अनिल टुटेजा (संयुक्त सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग छत्तीसगढ़) शराब सिंडिकेड के सदस्य अनवर ढेबर, अरविंद सिंह ने झारखंड में भी अपनी पकड़ बनाने की योजना के तहत नयी नीति को प्रभावित किया है।
झारखंड में शराब घोटाले की जड़ें छत्तीसगढ़ से जुड़ी हुई है। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला सीबीआई जांच से यह पता चला है कि जनवरी 2022 में रायपुर में झारखंड और छत्तीसगढ़ के उत्पाद विभागों के अधिकारियों की बैठक हुई थी जिसके बाद झारखंड विधान सभा में प्रस्ताव लाकर छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) की तर्ज पर शराब बिक्री का मॉडल अपनाया गया, इसके लिए सिएसएमसीएल के तत्कालीन एमडी अरुणपति त्रिपाठी को कंसल्टेंट बनाया गया था और उन्हें 1.25 करोड़ रुपये भुगतान भी किया गया था।
शराब और मैनपावर सप्लाई के लिए जारी निविदाओं में जानबूझ कर ऐसी शर्तें रखी गयी जिससे झारखंड की स्थानीय कंपनियां बाहर हो जाये। निविदा में शामिल होने के लिए 100 करोड़ रुपए का टर्नओवर, 310 करोड़ रुपए का भारी भरकम ई - कॉमर्स कंपनी और बैंक गारंटी, 2 वर्षों में 4 करोड़ की सरकारी कार्य का अनुभव अनिवार्य कर दिया गया जिससे नतीजा यह हुआ कि झारखण्ड के स्थानीय कंपनी बाहर हो गया और छत्तीसगढ़ की कम्पनियां - सुमित फैसिलिटीज, ईगल हंटर सॉल्यूशंस और ए टू जेड इंफ्रा को ठेके दिये गये।