Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
झारखंड

यज्ञ प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति का आधार रहा है : आचार्य शरच्चंद्र

शेयर करें: WhatsApp Facebook X
यज्ञ प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति का आधार रहा है : आचार्य शरच्चंद्र
विज्ञापन
  • पर्यावरण संरक्षण सह- ज्ञान यज्ञ का आयोजन
  • गांव के 65 घरों के सैकड़ो जनजातीय समाज के लोग यज्ञ में शामिल होकर नशापान न करने का लिया संकल्प

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। आर्य समाज स्थापना के 150 वें वर्षगांठ के अवसर पर वसंत पंचमी के दिन को लोहरदगा जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर पेशरार प्रखंड के वन क्षेत्र में स्थित ओनेगड़ा गांव के इचुवाटांड में रविवार को पर्यावरण संरक्षण सह- ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया। इसमें गांव के 65 घरों के तमाम महिला- पुरुष,बच्चे समेत सैकड़ो ग्रामीण शामिल हुए।

गुरुकुल शांति आश्रम लोहरदगा के आचार्य संचालक -सह- झारखंड प्रांत आर्य वीर दल प्रमुख आचार्य शरच्चंद्र आर्य, आशीष आर्य, ब्रह्मचारी कार्तिक आर्य, रंजन आर्य, राजकुमार आर्य के नेतृत्व में यज्ञ हुआ। इसमें ग्रामीणों ने यजमान के रूप में शामिल ग्रामीणों ने समिधा समर्पित कर नशापन न करने का संकल्प लिया यही नहीं आसपास के लोगों को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक करने की भी बात कही। 

यज्ञाचार्य शरच्चंद्र आर्य ने कहा कि यज्ञ प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति का आधार रहा है। हमारे आर्ष ग्रन्थ बड़ी ही मजबूती के साथ यज्ञ के महत्व का एक स्वर में गान करते है। अपने उत्कृष्ट मनोवैज्ञानिक मूल्यों के लिए जाना जाता रहा है। यज्ञ से पर्यावरण की शुद्धि होती है।  

संगतिकरण, सामजिक समरसता, आन्तरिक अभियांत्रिकी और व्यक्तित्व विकास जैसे अनेक व्यक्तिगत मनोवैज्ञानिक मूल्य व्यक्ति में विकसित होते है, जिनका सुस्पष्ट प्रभाव समाज पर दृष्टिगोचर होता है। यज्ञ मात्र कर्मकांड तक सीमित प्रक्रिया नहीं है, अपितु यह उससे कहीं अधिक, व्यक्ति और समाज का बहुमुखी विकास करने का अचूक साधन है।

वेदों से लेकर आधुनिक वैज्ञानिकों तक सभी ने यज्ञ की उर्जा को विभिन्न पैमानों पर मापकर सही पाया है। वर्तमान समय में संसाधनों से अधिक मनोबल की आवश्यकता है और हमारी इस आवश्यकता को यज्ञ से बेहतर कोई पूर्ण नहीं कर सकता। यज्ञ में मौजूद अग्निशक्ति, मंत्र शक्ति एवं समूह शक्ति का समायोजन क्रांतिकारी बदलाव लाने में सक्षम है।

आशीष आर्य ने इस मौके पर कहा कि यज्ञ से शरीर स्वस्थ रहता है। यज्ञ से मनचाहा फल मिलता है। यज्ञ से देवताओं को प्रसन्न किया जा सकता है। यज्ञ से जीवन शक्ति बढ़ती है।यज्ञ से आत्मिक शक्ति बढ़ती है। यज्ञ से वायुमंडल और पर्यावरण शुद्ध होता है।यज्ञ से संक्रामक बीमारियां खत्म होती हैंयज्ञ से सहयोग और सद्भावना बढ़ती है।यज्ञ से शांति स्थापित होती है।

लोहरदगा शहर के सामाजिक कार्यकर्ता गुप्तेश्वर गुप्ता ने इस मौके पर कहा कि यज्ञ से समष्टि का कल्याण होता है। यज्ञ से जीवन जीने का तरीका बेहतर होता है। यज्ञ को भारतीय संस्कृति का आधारभूत मनोवैज्ञानिक मूल्य माना जाता है।

आयोजनकर्ता सुखनाथ नगेसिया ने इस मौके पर कहा कि यज्ञ को विज्ञान-सम्मत पद्धति माना जाता। इस अवसर पर तिवारी नगेशिया, जीतू नगेशिया, जोगेंद्र नगेशिया, सानिया नगेसिया, मुन्ना नगेसिया, मुकुंद नगेशिया बीतन नगेशिया लगन नगेशिया, नगेशिया, नूता नागेशिया आदि मौजूद थे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुई।

विज्ञापन

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.

कुल पाठक (Total Visitors): 121,197