Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
लाइव: 13
होम ई-पेपर देश झारखंड खेल समाचार राज काज कानून व्यवस्था करियर बिजनेस वर्ल्ड हेल्थ विचार ज्ञान विज्ञान समाज वन और पर्यावरण मनोरंजन बिहार विज्ञापन
झारखंड

महाकुंभ में झारखंड के परिवार को साधु रूप में मिला खोया हुआ परिजन

शेयर करें: WhatsApp Facebook X Back to ePaper
महाकुंभ में झारखंड के परिवार को साधु रूप में मिला खोया हुआ परिजन
विज्ञापन

27 साल बाद कुंभ मेले में मिले अपने

टीम एबीएन, रांची। प्रयागराज महाकुंभ में एक परिवार 27 साल बाद अपने पिछड़े हुए परिजन से मिला। परिवार ने अब उनके मिलने की उम्मीद ही छोड़ दी थी। उन्हें मान लिया था कि या तो वह इस दुनिया में नहीं है और या फिर वह किसी ऐसे स्थान पर चले गये हैं, जहां से वापस आना संभव नहीं है। हालांकि, दिल की किसी कोने में उनके मिलने की उम्मीद बाकी थी। मामला झारखंड के परिवार का है। 

परिवार ने बुधवार को दावा किया कि प्रयागराज में कुंभ मेले में उन्हें उनका खोया हुआ एक परिजन मिल गया है। इसके साथ ही उनकी 27 साल से जारी परिजन की तलाश अब समाप्त हो गयी है। खोये हुए परिजन गंगासागर यादव अब 65 वर्ष के हैं। वह अघोरी साधु बन गये हैं। अब उनका नाम बाबा राजकुमार है। 

उनके परिवार ने बताया कि 1998 में पटना की यात्रा के बाद गंगासागर लापता हो गये थे। उनकी पत्नी धनवा देवी ने अपने दो बेटों कमलेश और विमलेश की अकेले परवरिश की। गंगासागर के छोटे भाई मुरली यादव ने कहा- हम उन्हें दोबारा देखने की उम्मीद खो चुके थे, लेकिन कुंभ मेले में गये हमारे एक रिश्तेदार ने गंगासागर जैसे दिखने वाले एक व्यक्ति की तस्वीर ली और हमें भेजी। 

इसके बाद मैं, धनवा देवी और उनके दो बेटों के साथ कुंभ मेला पहुंचा। मेले में पहुंचने पर परिवार का सामना बाबा राजकुमार से हुआ, लेकिन उन्होंने गंगासागर यादव के रूप में अपनी पूर्व पहचान स्वीकार करने से इनकार कर दिया। बाबा राजकुमार ने वाराणसी का साधु होने का दावा किया। 

उन्होंने और उनकी साध्वी साथी ने पूर्व के किसी भी संबंध से इनकार किया। हालांकि, परिवार अपने दावे पर अड़ा रहा, क्योंकि बाबा राजकुमार पूरी तरह से गंगासागर यादव से मिलते जुलते हैं, यहां तक कि उनके माथे और घुटने पर चोट के हूबहू वैसे ही निशान मिले जो गंगासागर यादव के थे।

विज्ञापन