- कानूनी विकल्प तो खुला है… JMM नेता ने केंद्र सरकार को क्यों दी सीधी-सीधी चुनौती?
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में चुनाव के बाद से ही जेएमएम राज्य के 1.36 लाख करोड़ रुपए की बकाया कोयला रायल्टी के मुद्दे पर केंद्र को घेर रही है। अब इस मामले में जेएमएम ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनका पैसा वापस नहीं दिया जाता है, तो वे केंद्र के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। झारखंड विधानसभा चुनाव और उसके बाद भी 1 लाख 36 हजार करोड़ का मामला चर्चा में है।
सीएम हेमंत सोरेन ने शपथ ग्रहण के बाद ही केंद्र से मांग की थी कि राज्य का पैसा लौटा दिया जाए। उन्होंने उस दौरान ऐसा नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की बात कही थी। इस बीच जेएमएम नेता मनोज पांडे ने भी केंद्र से पैसे की मांग की है। उन्होंने कहा कि नहीं तो हमारे पास कानूनी विकल्प खुले हैं। हम उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
जेएमएम नेता मनोज पांडे ने कहा कि हम कोई बहाना नहीं बना रहे हैं. हमें काम करने का जनादेश मिला है और हम वो करेंगे। कल सीएम ने अधिकारियों के साथ बैठक की और सभी को काम बांट दिया है। लोगों को आने वाले समय में सुशासन दिखेगा। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग दिल्ली में बैठे हैं, हम उनसे कहना चाहते हैं कि हमें हमारा 1 लाख 36 हजार करोड़ दे दीजिए, नहीं तो हमारे पास कानूनी विकल्प खुले हैं।
हम उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बीजेपी की तरफ से आरोप लगाया जाता है कि ये सारा पैसा कांग्रेस की सरकार के समय का है। उस समय राज्य सरकार ने ये पैसा क्यों नहीं केंद्र से लिया। इस पर मनोज पांडे ने कहा कि हमारा पैसा हमें लेना है, किसकी सरकार का है, कब का है इससे कोई मतलब नहीं है।
हमारा पैसा है और इसके लिए कोर्ट भी आदेश कर चुका है। हम अपना पैसा लेकर रहेंगे। ऐसा माना जा रहा है कि बकाए पैसे के लिए झारखंड सरकार आने वाले समय में मनी सूट दायर कर सकती है। हेमंत सोरेन ने पिछले दिनों बकाये की डिटेल देते हुए बताया कि कुल बकाया राशि लगभग 136042 करोड़ रुपए है।
इसमें वॉश्ड कोयला रॉयल्टी के रूप में 2900 करोड़ रुपए, पर्यावरण मंजूरी सीमा उल्लंघन के लिए 3200 करोड़ रुपए, भूमि अधिग्रहण मुआवजे के रूप में 42142 करोड़ रुपए शामिल हैं। इस पर सूद की रकम 60 हजार करोड़ रुपए है। इस बकाया राशि के कारण राज्य में अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं प्रभावित हुई हैं, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला और विकास, स्वच्छ पेयजल शामिल है।
उन्होंने कहा, बच्चों, बुजुर्ग, किसान, मजदूर, आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यक, विस्थापित और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्तियों तक योजनाओं को लागू करने में कठिनाई हो रही है। झारखंड एक अल्प विकसित राज्य है, जो संसाधनों की कमी के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए इस राशि की जरूरत है।