कोडरमा के शैक्षणिक विकास के लिए जेजे कॉलेज को यूनिवर्सिटी बनाने की वकालत
जे जे कॉलेज सभी मापदंडों को पूरा करता है, इसे विवि बनाना चाहिए
टीम एबीएन, कोडरमा। झारखंड राज्य जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष सह कोडरमा जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष शालिनी गुप्ता ने कोडरमा जिला के सभी महाविद्यालयों को विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग से हटाकर नवनिर्मित सर जेसी बोस विश्वविद्यालय, गिरिडीह में सम्मिलित किये जाने के निर्णय का कड़ा विरोध किया है।
इस संबंध में राज्य सरकार से अपील की है कि वह इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर जगन्नाथ जैन कॉलेज को गिरिडीह के सर जेसी बॉसी मे जोड़ने के बजाय जे जे कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाये, ताकि कोडरमा के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने की जरूरत न पड़े और वे अपने ही जिले में बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकें।
कोडरमा जिला के सभी महाविद्यालयों को विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग से हटाकर नवनिर्मित सर जेसी बोस विश्वविद्यालय, गिरिडीह में सम्मिलित किये जाने से छात्रों और शिक्षकों की परेशानियां बढ़ जायेंगी। गिरिडीह विश्वविद्यालय की दूरी के कारण प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी यात्रा करनी पड़ेगी, जिससे समय और धन की अतिरिक्त बर्बादी होगी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह निर्णय कोडरमा के शैक्षिक विकास के लिए एक बाधा साबित हो सकता है और सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि जगन्नाथ जैन कॉलेज को गिरिडीह के विश्वविद्यालय में सम्मिलित करने के बजाय इस कॉलेज को ही विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जाना चाहिए।
शालिनी गुप्ता ने अपने बयान में कहा कि जगन्नाथ जैन कॉलेज सभी आवश्यक मापदंडों को पूरा करता है जो एक विश्वविद्यालय बनने के लिए जरूरी होते हैं। यहां पर वर्तमान में विभिन्न संकायों में लगभग 8000 से 10000 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसके अलावा, डोमचांच में निर्मित महिला डिग्री कॉलेज की पढ़ाई भी फिलहाल जगन्नाथ जैन कॉलेज में ही संचालित हो रही है, क्योंकि डोमचांच महिला कॉलेज की बिल्डिंग तो बनकर तैयार है, लेकिन प्रोफेसर और कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हो पायी है।
शालिनी गुप्ता ने कहा कि हाल ही में रांची कॉलेज को श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है। इसी तरह कोडरमा के जगन्नाथ जैन कॉलेज को भी विश्वविद्यालय का दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोडरमा जिला एक भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है जहां की सड़क और रेल नेटवर्क से जगन्नाथ जैन कॉलेज पहुंचना बेहद आसान है। ऐसे में अगर इस कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जाता है, तो हजारीबाग, गिरिडीह, और कोडरमा क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को विशेष लाभ मिलेगा।
उन्होंने आगे कहा कि कोडरमा के सुदूर इलाकों जैसे सतगावा और मरकच्चो के छात्र-छात्राओं को भी इस फैसले से काफी लाभ मिलेगा और उन्हें पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। 1960 में कोडरमा के पिछड़े क्षेत्र में सामाजिक और शैक्षणिक विकास के लिए जगन्नाथ जैन कॉलेज की स्थापना की गयी थी। यह कॉलेज 1977 में रांची विश्वविद्यालय की एक घटक इकाई बना और 1983 में यूजीसी से पंजीकृत हुआ।
शालिनी गुप्ता ने यह भी बताया कि 1992 में रांची विश्वविद्यालय से अलग होकर विनोबा भावे विश्वविद्यालय का गठन हुआ था। इसके बाद, एक दशक पहले, कोयलांचल के धनबाद में बिनोद बिहारी विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी। अब उसी तर्ज पर, अभ्रकांचल क्षेत्र के कोडरमा जिले में स्थित जगन्नाथ जैन कॉलेज को भी विश्वविद्यालय का दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोडरमा जिला शिक्षा के क्षेत्र में पहले से ही एक हब के रूप में विकसित हो रहा है, और इस कदम से इसे और अधिक मजबूती मिलेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि जगन्नाथ जैन कॉलेज को सरकार द्वारा भी प्रीमियम कॉलेज के रूप में मान्यता दी जा चुकी है। कॉलेज के आधुनिकीकरण के लिए कैबिनेट में डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) भी भेजी जा चुकी है। इस योजना के तहत लगभग 80 से 90 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित है, जिसमें नये भवनों का निर्माण, आॅडिटोरियम, कैंटीन, इंडोर और आउटडोर स्टेडियम जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।
शालिनी गुप्ता ने जोर देकर कहा कि सरकार को जल्द से जल्द इस प्रस्ताव को पारित कर निविदा निकालनी चाहिए, जिससे कोडरमा जिले के छात्रों को हजारीबाग जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उन्हें अपने ही जिले में बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकेंगी। उन्होंने कहा कि कोडरमा पहले से ही शिक्षा के क्षेत्र में एक हब के रूप में विकसित हो चुका है, जहां राज्य का एकमात्र सैनिक स्कूल तिलैया डैम में संचालित हो रहा है।
कोडरमा जिले की रेल सुविधाएं और डीवीसी की केटीपीएस इकाई, जो देश के विभिन्न राज्यों में बिजली की आपूर्ति करती है, भी जिले की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को मजबूत करती हैं। ऐसे में जगन्नाथ जैन कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा मिलना न केवल कोडरमा, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा।