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भविष्य में जयराम के हाथों में होगी सत्ता की चाबी

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भविष्य में जयराम के हाथों में होगी सत्ता की चाबी
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  • जयराम महतो की पार्टी ने उड़ाई राजनीतिक दलों की नींद
  • सुदेश महतो के लिए भी बनी चुनौती, मिले भविष्य के कई संकेत

टीम एबीएन, रांची। रांची, गिरिडीह और हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र में चुनाव संपन्न हो चुका है। परिणाम 4 जून को आयेगा। लेकिन चुनाव के दौरान झारखंड भाषा खतियान संघर्ष समिति के उम्मीदवारों ने इन तीनों लोकसभा क्षेत्रों में जिस तरह अपनी उपस्थिति दर्ज करायी है। वह भविष्य की राजनीति के लिए कई संकेत दे गया है। राज्य में स्थापित दलों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। कुर्मी वोटों के दावेदार दलों के लिए खतरे की घंटी है। आजसू, झारखंड मुक्ति मोर्चा और भाजपा के लिए जय राम महतो की पार्टी चुनौती बनकर उभरी है।   

गिरिडीह में जयराम महतो ने तो अपनी उपस्थिति से लड़ाई को त्रिकोणात्मक बना दिया है। सबको चौंका दिया है। यदि चुनाव परिणाम पर जयराम महतो की पार्टी ने असर डाला तो फिर विधानसभा चुनाव दिलचस्प होने वाला है। स्थापित दलों के आका नेताओं के लिए भी जयराम महतो चुनौती बनते दिख रहे हैं। कुर्मी वोटों के दावेदार की चिंता बढ़ा दी है । उनके राजनीतिक वजूद पर सवाल है।

चुनाव परिणाम आने के बाद ही सही तस्वीर सामने आयेगी। लेकिन मतदान के दौरान गिरिडीह हजारीबाग और रांची लोकसभा क्षेत्र के कुर्मी बहुल इलाकों में इस पार्टी ने जिस तरह असर डाला है इससे नए राजनीतिक संकेत मिल रहे हैं। इस नयी पार्टी के साथ युवाओं की बड़ी टोली है। 

इसमें कुर्मी जाति के साथ-साथ अन्य जाति के युवा भी हैं। यदि युवा किसी के साथ जुड़ जाए तो उसकी ताकत का अंदाजा  लगाया जा सकता है युवा ही आज निर्णायक स्थिति में हैं। स्थानीय नीति, बेरोजगारी युवाओं के साथ धोखा, वादा खिलाफी व नियुक्तियों में घोटाला सहित अन्य मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाकर जय राम महतो और उनकी टीम ने युवाओं को अपनी ओर आकर्षित किया है। 

लोकसभा चुनाव के ठीक पहले जयराम महतो और देवेंद्र महतो को पुलिस प्रशासन ने गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी पुराने मामले में हुई। चुनाव के ठीक पहले गिरफ्तारी का गलत संदेश युवाओं में गया। सरकार की साजिश मानकर बड़ी संख्या में लोग जय राम महतो के साथ जुड़े। उनको सहानुभूति मिली। यही वजह रही की गिरिडीह में जयराम महतो ने अपने दम पर बड़ी-बड़ी सभाएं की। 

झारखंड मुक्ति मोर्चा के स्थापित नेता मथुरा महतो और एनडीए उम्मीदवार सह आजसू प्रत्याशी सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी की  नींद उड़ गई। चुनाव के दौरान दोनों नेता बहुत परेशान दिखे। परेशानी की वजह जयराम महतो ही थे। मतदान के दिन गिरिडीह में जयराम महतो को अच्छा खासा वोट मिला है। वह लड़ाई के तीसरे कोण हैं। रांची में देवेंद्र महतो और हजारीबाग में संजय मेहता ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करायी है। 

कुर्मी बहुल इलाकों में इन दोनों नेताओं को अच्छा खासा मत मिला है। चुनाव परिणाम के बाद तस्वीर साफ होगी। लेकिन इतना तय है कि आने वाले दिनों में यह पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा, आजसू और भाजपा के लिए परेशानी पैदा करने वाली है। 

विधानसभा चुनाव में जयराम महतो की पार्टी गुल खिला सकती है। कुछ विधानसभा क्षेत्रों में समीकरण बिगाड़ने के लिए यह पार्टी तैयार हो गयी है। सुदेश महतो के लिए भी यह पार्टी चुनौती बनी हुई है। इस पार्टी के उभार से सबसे अधिक नुकसान आजसू और झारखंड मुक्ति मोर्चा को ही होने वाला है। एक मजबूत कुर्मी युवा नेता के उभार ने चिंता पैदा कर दी है।

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