- समाज के गौरवशाली इतिहास पर ही विशेष चर्चा
टीम एबीएन, कोडरमा। माहुरी वैश्य समाज के उत्थान और विकास के लिए समर्पित माहुरी वैश्य महामंडल का 111वां स्थापना दिवस झुमरी तिलैया बाईपास स्थित शिववाटिका मे बड़े ही धूमधाम से संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुवात मां मथुराशिनी के चित्र पर पुष्प अर्पित किया गया।
जिसके बाद दीप प्रज्वलित किया गया, इसके पूर्व आरिणी भदानी के गणेश वंदना के नृत्य के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर महामंडल के सदस्यों ने समाज के गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने और भविष्य की चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। अधिवेशन में समाज के महान विभूतियों और मानिसियों का सम्मान किया गया। जिन्होंने 111वां वर्ष पहले देश की गुलामी के समय समाज को एक सूत्र में बांधकर रखने के लिए इस संगठन की नींव रखी थी।
महामंडल के स्थापना दिवस का आयोजन झारखंड और बंगाल के 43 मंडलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में प्रभात भदानी और सबसे पुराने मां मथुराशिनी मंदिर के संस्थापक परिवार के प्रतिनिधि सुयश भदानी को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रभात व सुयश भदानी ने कहा- समाज की एकता और विकास के लिए यह संगठन निरंतर कार्यरत है। हमें गर्व है कि हमारे पूर्वजों ने इस संगठन की स्थापना की और आज हम उनके सपनों को साकार कर रहे हैं।
अधिवेशन में माहुरी समाज के गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक विशेष मंथन सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में समाज के इतिहास की झलक प्रस्तुत की गयी और समाज के विभूतियों के योगदान को सराहा गया। इसके साथ ही समाज द्वारा किये गये कार्यों और उपलब्धियों का अवलोकन किया गया।
जिसके बाद एक विशेष वीडियो लॉन्च किया गया, जिसमें समाज के इतिहास की झांकी प्रस्तुत की गयी। इस वीडियो में समाज के पूर्व में अपना समय समाज को देने वाले महान व्यक्तियों के योगदान को उजागर किया गया, जिनके प्रयासों ने समाज की उपलब्धियों को बढ़ावा दिया। इस वीडियो में समाज के सामाजिक कार्यों का भी अवलोकन किया गया, जिन्होंने समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके माध्यम से समाज के सदस्यों को उनके समर्थकों की प्रतिभा और समर्थन को महत्त्वपूर्ण रूप से स्वीकारा गया, जो समाज के उन्नयन के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
मां मथुराशिनी मंदिर, जो गया, बरबीघा, बिहार शरीफ, मिर्जागंज, और गिरिडीह में स्थित हैं, पर प्रकाश डाला गया और इन मंदिरों की महत्ता को रेखांकित किया गया। समाज के सदस्यों ने मां मथुराशिनी मंदिर के विकास और संरक्षण के लिए अपने सहयोग का वचन दिया। इसके अलावा, झुमरी तिलैया माहुरी वैश्य मंडल के धरोहर पर भी चर्चा की गयी।
अधिवेशन में समाज के वर्तमान धरोहरों में से समाज चिंतक वंमाली राम भदानी का उदबोधन हुआ। वंमाली भदानी ने समाज के विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा, हमारे समाज ने पिछले 111 वर्षों में अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। यह हमारे समाज की एकता और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। अब हमें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।
इस अवसर पर समाज के वर्तमान चिंतकों ने भी अपने विचार साझा किये और समाज के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं पर चर्चा की। अधिवेशन में समाज के युवाओं को भी प्रोत्साहित किया गया और उन्हें समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।
माहुरी समाज के नवरत्न के रूप में समाज ने 5 संस्थापको और 4 दानवीर ने मिलकर संगठन की नीव रखी। इन 5 नवरत्नों और दानवीरो नेसमाज को सशक्त और सुरक्षित बनाया है। साथ ही उन्होंने शिक्षा, सामाजिक सेवा और आर्थिक सहायता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान भी किया है। इन नवरत्नों के चित्रों पर समाज ने श्रद्धा सुमन पुष्प अर्पित किये। उनके योगदान को समाज ने 111 वर्षों तक साथ निभाने के लिए धन्यवाद दिया।
माहुरी वैश्य महामंडल अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि आपातकाल के दौरान हमारा संगठन, सभा नहीं कर पाने के बावजूद, आपातकाल समाप्त होते ही हम मजबूती के साथ पुनः संगठित हुए। यह हमारे समाज की एकता और समर्पण का प्रमाण है। हमें गर्व है कि हमने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने समाज को एकजुट रखा और आज हम उसी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ रहे हैं।केंद्रीय माहुरी नवयुवक समिति अध्यक्ष संजीत तरवे ने कहा कि माहुरी वैश्य महामंडल ने उन सभी व्यक्तियों का सम्मानित दिया जाएगा जिन्होंने अपने 100 वर्षों के इतिहास में समाज के लिए योगदान दिया है। उन्होंने समाज के उत्थान में साझेदारी और सामर्थ्य का महत्व उजागर किया। वह समाज के हर व्यक्ति के योगदान की मूल्यांकन का आदर्श देते हुए समाज की सभी ऊर्जा को एक मंच पर एकत्रित करने की आवश्यकता को बल दिया। इससे समाज के सभी वर्गों के लोग एक साथ आकर्षित होंगे और समाज के विकास में सहयोग करेंगे।
संजीत तरवे ने कहा कि माहुरी वैश्य महामंडल ने उन सभी व्यक्तियों का सम्मान किया जायेगा, जिन्होंने अपने 100 वर्षों के इतिहास में समाज के लिए योगदान दिया है। उन्होंने समाज के उत्थान में साझेदारी और सामर्थ्य का महत्व उजागर किया। वह समाज के हर व्यक्ति के योगदान की मूल्यांकन का आदर्श देते हुए समाज की सभी ऊर्जा को एक मंच पर एकत्रित करने की आवश्यकता को बल दिया।
मौके पर गिरिडीह निवर्त्तमान उपमहापौर प्रकाश सेठ, महामंडल उपाध्यक्ष रवि कप्सिमे, महामंत्री उमाशंकर चरण पहाड़ी, संगठन मंत्री प्रदीप कुमार हरिमोहन कंधवे, निवर्त्तमान वार्ड पार्षद आशीष भदानी, रीता देवी, सुजीत लोहानी, विशाल भदानी, सुनील बड़गवे, प्रतिक कुमार, विशाल सेठ, साहिल भदानी, अभिषेक रंजन, उदय बड़गवे, आशुतोष भदानी, मुरारी बड़गवे, अविनाश सेठ, बिनोद भदानी, अंकित एकघरा, सागर भदानी, हिमांशु सेठ, शुभम कप्सिमे, गौतम वैष्खियार, मण्डल अध्यक्ष मुन्ना भदानी, संजय तरवे, ज्ञान कप्सिमे, सुनीता सेठ, पूर्णिमा सेठ, ललिता भदानी, पूर्णिमा सेठ, सरोज पवनचौदह,सहित सैकड़ो की संख्या में समाज के लोग मौजूद थे।