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बैंकों के निजीकरण के खिलाफ 16-17 की हड़ताल को सफल बनाएं : सीटू

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बैंकों के निजीकरण के खिलाफ 16-17 की हड़ताल को सफल बनाएं : सीटू
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कोडरमा। सेन्टर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) ने बैंकों के निजीकरण के खिलाफ 16 - 17 दिसंबर को आयोजित देशव्यापी दो दिवसीय बैंक हड़ताल को सफल बनाने का आह्वान किया है। बयान जारी कर सीटू के राज्य कमिटी सदस्य संजय पासवान ने कहा कि केन्द्र सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में बैंकिंग अधिनियम मे संशोधन कर देश की सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों को निजी घरानों के हवाले करने की तैयारी कर रही है, जिसकी घोषणा संसद के पिछले बजट सत्र मे वित्त मंत्री निर्मला सीता रमण कर चुकी हैं। इसके पहले सरकार ने 29 राष्ट्रीय कृत बैंकों मे से कुछ प्रमुख बैंकों का एकीकरण कर दिया जिसके बाद अब केवल 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ही अस्तित्व मे रह गए हैं। अब सरकार इन बचे हुए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को निजी पूंजीपतियों के हवाले कर जनता की गाढ़ी कमाई के बचतों को दांव पर लगा रही है। उन्होंने कहा कि आज से 51 साल पहले वर्ष 1969 मे बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था। जिसके बाद सच मायने मे बैंकिंग सेवा ने देश की जनता के आर्थिक विकास मे महत्वपूर्ण भूमिका अदा की और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकों की शाखाएं खुलने से देश मे कृषि का भी विकास हुआ। इतना ही नहीं, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की जमा पूंजी में भी भारी ईजाफा हुआ। यदि बड़े पैमाने पर कॉरपोरेट घरानों के बैंक लोन को राइट आफ करने और बड़े आर्थिक खिलाड़ियों द्वारा बैंक की बड़ी भारी राशि डकार लिए जाने (जिसे अब एनपीए कहा जा रहा है) को सरकारी संरक्षण नहीं रहता तो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक जो अभी भी हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और ज्यादा योगदान दे सकते थे। इस परिस्थिति में बैंकों के निजीकरण की कोशिश हमारी आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था को पुरी तरह नष्ट कर देगा। इसलिए सीटू युनाईटेड फोरम आफ बैंक यूनियन्स के आह्वान पर बैंक कर्मचारियों की 16-17 दिसंबर की दो दिवसीय हड़ताल का समर्थन करते हुए अपनी सभी संबद्ध यूनियनों को आह्वान करता है कि इस हड़ताल के साथ एकजुटता जाहिर करते हुए बैंक कर्मियों की हड़ताल का समर्थन करें।
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