टीम एबीएन, रांची। इंटरनेशनल कांफ्रेंस सस्टेनेबल जस्ट ट्रांजिशन फॉर फ्यूचर रेडी झारखंड के पहले दिन जस्ट ट्रांजिशन से संबंधित वैश्विक परिप्रेक्ष्य और बेस्ट प्रैक्टिसेज पर विमर्श के दौरान इसकी प्रासंगिकता को क्रियान्वित करने पर बल दिया गया।
इस दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन टास्क फोर्स सस्टेनेबल जस्ट ट्रांजिशन (सीड) यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) के सहयोग से हुआ। कांफ्रेंस के दौरान टास्क फोर्स के आधिकारिक वेबसाइट का शुभारंभ भी हुआ।
इस कार्यक्रम में मुख्य सचिव एल खियांग्ते ने कहा कि राज्य सरकार प्रतिबद्ध है कि सस्टेनेबल ट्रांजिशन की इस प्रक्रिया में कोई भी पीछे नहीं छूटे। इसलिए इसे समावेशी एवं सहभागी बनाया गया है। इसी क्रम में राज्य में बेहतर नीति-निर्धारण को दिशा देने के लिहाज से दुनिया के बेस्ट प्रैक्टिसेज पर चर्चा के लिये आज का दिन विशेष है। कार्बन-न्यूट्रल और जलवायु अनुकूल अर्थव्यवस्था की दिशा में बेहतर परिणाम के लिये राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रयासों में कन्वर्जेन्स एप्रोच एवं व्यापक विजन बेहद महत्वपूर्ण है।
कांफ्रेंस में जापान, अमेरिका, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया समेत विश्व के तीस देशों की प्रसिद्ध संस्थाओं, इंडस्ट्री लीडर्स, एनर्जी एवं सस्टनेबिलिटी एक्सपर्ट्स और सिविल सोसाइटी ने ट्रांजिशन से जुड़े नीतिगत पहलों एवं कदमों अपने अनुभव एवं विचार प्रस्तुत किये।
कांफ्रेंस में एके रस्तोगी, अध्यक्ष टास्क फोर्स.सस्टेनेबल जस्ट ट्रांजिशन ;झारखंड सरकार, मनोज सिंह, संदीप नायक, एस सुरेश कुमार, डॉ संजय श्रीवास्तव, संजय श्रीवास्तव, डॉ डीके सक्सेना, आशीष तिवारी, एस राकेश कुमार, इसाबेल त्सचान ने सत्रों को संबोधित किया।
एकेण् रस्तोगी ने बताया कि यह भारत में अपनी तरह का पहला वैश्विक परिदृश्य का कार्यक्रम है, जो जस्ट ट्रांजिशन की सफल रणनीतियों एवं प्रभावी कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा पेश करता है। उन्होंने आगे कहा कि यह पहल झारखंड के भावी कदमों को चिह्नित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। इससे एनर्जी ट्रांजिशन, डीकार्बनाइजेशन, लाइवलीहुड, ग्रीन हाइड्रोजन, इन्वेस्टमेंट एवं फाइनेंस आदि प्राथमिकता क्षेत्रों से संबंधित रोडमैप को सुसंगत बनाने में मदद मिलेगी।
मौके पर मनोज सिंह ने कहा कि जस्ट ट्रांजिशन के संदर्भ में दूरगामी कदम उठाने के लिहाज से झारखंड एक अग्रणी राज्य बन गया है। आज का कॉन्फ्रेंस इस व्यापक पहल की एक अहम कड़ी है। झारखंड के परिवेश के लिए अनुकूल कम कार्बन से जुड़े नवाचारों और प्रभावी रणनीतियों को अपनाना चाहिए। इजाबेल त्सचान ने स्वच्छ ऊर्जा आधारित बुनियादी ढांचे, निवेश और वैकल्पिक आजीविका को बढ़ावा देने के लिए ज्ञान साझा करने पर जोर दिया।
उन्होंने झारखंड में जस्ट ट्रांजिशन को और समावेशी बनाने के लिए सामुदायिक हित एवं जेंडर समानता को प्राथमिकता सूची में सर्वोपरि बताया। राज्य सरकार की पहल की सराहना करते हुए सीड के सीईओ श्री रमापति कुमार ने कहा कि सस्टेनेबल ट्रांजिशन से संबंधित विश्वव्यापी पहल के साथ झारखंड के प्रयासों को जोड़ने के लिहाज से यह कांफ्रेंस बेहद महत्वपूर्ण है।
वैश्विक अनुभवों की रौशनी में क्षेत्रीय एवं स्थानीय स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा एवं क्लाइमेट रेसिलिएंट के मॉडल तैयार किया जाना चाहिएए इसके लिए अनुकूल नीतिगत परिवेशए वित्तीय तंत्र बनाने और सेक्टोरल कन्वर्जेन्स आवश्यक है। दो दिनों तक चलने वाला यह सम्मेलन जस्ट ट्रांजिशन के बहुआयामी पहलुओं पर संवाद के लिये विविध टेक्निकल एवं ब्रेकआउट सत्रों में संचालित हुआ। जो कार्यक्रम में राज्य सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, कृषि आदि विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने विचार रखे।
इसके साथ ही स्टिचिंग सेड फंड, शक्ति सस्टेनेबल एनर्जी फाउंडेशन, जीआईजेड इंडिया, ओपन एनर्जी ट्रांजिशन जर्मनी, बेस्ट महाराष्ट्र, इंटरनेशनल काउंसिल आन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन, इंटरनेशनल एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस क्लाइमेट ग्रुप, इंडिया क्लाइमेट कोलैबोरेटिव, क्लाइमेट पॉलिसी इंस्टीट्यूटए क्लाइमेट बॉन्ड इनिशिएटिव आदि संस्थाओं के वरीय पदाधिकारियों की भागीदारी रही।