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झारखंड

यदि राम नहीं है स्वासों में, तो प्राणों की घट रिता है...

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यदि राम नहीं है स्वासों में, तो प्राणों की घट रिता है...
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  • लोहरदगा पेशरार प्रखंड के इचवाटांड के जनजातीय समाज के लोगों ने कहा कि प्रभु श्रीराम ने हमें बुलाया है इसलिए पूजित अक्षत भिजवाया है
  • अयोध्या जी जायेंगे, राम लला के लिए 22को घर-घर ज्योत जलायेंगे

टीम एबीएन, लोहरदगा। अयोध्या धाम से लगभग साढे 600 किमी दूर झारखंड के लोहरदगा जिला के पेशरार प्रखंड में के सुदूरवर्ती गांव ओनेगडा में भी जनजातीय समाज के रामभक्त भी राम मंदिर निर्माण और उसमें रामलाल के विराजने को लेकर भारी उत्साह है।

ग्रामीणों ने जब गुनगुनाया यदि राम नहीं है स्वासों में, तो प्राणों की घट रिता है... तो मानो पूरे गांव के नदी- नालों, पेड़-पर्वतों में ही नहीं जन-जन के मन में राम रामे हो गये। गांव में अद्भुत वातावरण देखने को मिला। 

जैसे ही उनके हाथों में अयोध्या में पूजित अक्षत को आर्य समाज की संस्था आर्य वीरदल झारखंड प्रमुख आचार्य शरदचंद्र आर्य, आरएसएस गुमला विभाग के विभाग संघचालक मनोज दास और लोहरदगा जिला के प्रचारक दीपक कुमार के द्वारा उनके हाथों में अक्षत और पत्रक दिया गया, तो सभी भाव विभोर हो गये।

जनजातीय बुजुर्ग महिलाओं और पुरुषों ने कहा कि इस जंगल में निवास करने वाले हम जनजातियों के दर्द को भगवान श्रीराम ने हरने के लिए हमें निमंत्रण भेजा है। भले ही हम प्राण प्रतिष्ठा के दिन अयोध्या जी नहीं पहुंच पाये, पर इस निमंत्रण को हम स्वीकार करते हैं, कुछ दिनों बाद जरूर अयोध्या धाम जायेंगे रामलाल का दर्शन करेंगे। श्रीराम हमारे स्वासों में बसे हैं।

मौके पर आचार्य शरदचंद्र  आर्य ने कहा कि राम मंदिर निर्माण से भारत अपनी सांस्कृतिक धरोहरों और प्राचीन परंपराओं को पुनर्स्थापित कर रहा है। भारत के जन-जन के मन में भगवान राम फिर से उनके परंपराओं का अलख जगाने आ रहे हैं। हम भारत को उसकी सांस्कृतिक धरोहरों को वापस लौट रहे हैं। 

आप सभी वन कंदराओं में रहते हो, कंदमूल खाते हो पर भगवान श्री राम सबके हृदय में वास करते हैं। हम उनके अनन्य भक्त हैं। हमें अपार हर्ष हो रहा है, कि पांच शताब्दी के बाद भगवान श्रीराम अपने जन्मभूमि (घर) में फिर से पधार रहे हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि हम सभी प्राण प्रतिष्ठा के दिन 22 जनवरी को दिन में हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। रात को दीपावली मनायें। भगवान श्रीराम जिनके घर दीप जलेगा उन्हीं के घर आने वाले हैं। इसलिए हम सभी राम ज्योति जलायेंगे। 

घर-घर राम जी को बुलायेंगे। क्योंकि वह वनवास के समय हम ही वनवासियों के साथ उनका मिलन हुआ था। आज फिर से हम वनवासियों को वह निमंत्रण देकर बुला रहे हैं। हम जरूर अयोध्या जायेंगे, जय श्री राम के नारे लगायेंगे अपनी संस्कृति को प्रबल बनायेंगे। मौके पर बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग मौजूद थे।

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