टीम एबीएन, रांची। आज बच्चों की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता संपन्न हुई। पुस्तक मेला में जारी शैक्षिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में बच्चों की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता संपन्न हुई।
इस प्रतियोगिता में विभिन्न वेशभूषा में सजे सवेरे बच्चों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावक, माता-पिता भी किताबों के करीब आये। मेला परिसर में खासी गहमागहमी रही। कार्यक्रम रोचक रहा। कार्यक्रम को लोगों ने देखा और सराहा।
आज झारखंड के जनजातीय साहित्य पर भी मेला परिसर में गंभीर परिचर्चा हुई। इस कड़ी में झारखंड के जनजातीय साहित्य पर चर्चा की अध्यक्षता करते हुए कुरमाली भाषा और साहित्य के मूर्धन्य विद्वान एवं परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा राजाराम महतो ने कहा कि झारखंड का जनजातीय साहित्य समृद्ध और संपन्न है।
उद्घाटन वक्तव्य देते हुए डा माया प्रसाद ने कहा कि झारखंड का जनजातीय साहित्य विविधता में एकता का विलक्षण उदाहरण प्रस्तुत करता है। डॉ रामप्रसाद, पूर्व नागपुरी विभागाध्यक्ष सह साहित्यकार, गोस्सनर महाविद्यालय ने झारखंडी भाषाओं के वैशिष्ट्य पर प्रकाश डाला। डॉ हाराधन कोईरी, सहायक प्राध्यापक सह पंच परगनिया साहित्यकार, गोस्सनर महाविद्यालय ने पंच परगनिया साहित्य के महत्व पर प्रकाश डाला।
इस परिचर्चा में अनेक विद्वानों ने भाग लिया, जिनमें डॉ राज श्री जयंती, डा करण मिंज, नागपुरी विभागाध्यक्ष सह खोरठा साहित्यकार, जनजातीय क्षेत्रीय भाषा विभाग, रांची, डा संध्या चौधरी उर्वशी, डा वासुदेव प्रसाद, शाश्वत बी एड कालेज के अध्यक्ष डा अनिल कुमार शर्मा, उनके सहयोगी श्री सुरेश सिंह, वहां के शिक्षक डा रुपेश कुमार डा नागेंद्र कुमार , डा विनीता कुमारी,सुश्री ममता कुमारी ,लक्ष्मण प्रसाद,डा प्रमोद कुमार झा, डा श्री निवास ठाकुर ने उपस्थित होकर अपने विचार व्यक्त किये।
यह चर्चा झारखंड के जनजातीय साहित्य को समझने की दृष्टि विकसित करने में समर्थ एवं सार्थक रही। आज शाश्वत बी एड कालेज, रांची के प्राध्यापक गण और प्रशिक्षु शिक्षकों ने मेला परिसर का भ्रमण किया और मनोवांछित पुस्तकें खरीदीं।
आगत अतिथियों का भव्य स्वागत मेला प्रबंधक श्री चंद्रभूषण एवंं स्थानीय संयोजक डा जे बी पाण्डेय ने, सरस्वती वंदना सुश्री सपना साहनी ने कुशल संचालन डा अशोक कुमार प्रमाणिक ने और धन्यवाद ज्ञापन डा ओम प्रकाश ने किया। राष्ट्र गान से समापन हुआ।