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मनुष्य के लिए आध्यात्मिकता जरूरी : फादर प्रफुल बड़ा

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मनुष्य के लिए आध्यात्मिकता जरूरी : फादर प्रफुल बड़ा
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टीम एबीएन, रांची। धर्मसंघीय जीवन के 25, 50 व 60 साल पूरा करने पर जुबली वर्ष को विभिन्न तरीके से मनाने की योजना के तहत एक तीन दिवसीय सेमिनार का आयोजन संत अन्ना की पुत्रियों के धर्मसंघ के जनरेलेट, लोआडीह में हुआ। इसका समापन रविवार को हुआ। इस समिनार में फादर प्रफुल बड़ा मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद थे।

इस दौरान संत अन्ना की पुत्रियों के धर्म संघ के चारों प्रावींस (रांची, गुमला, जलपाईगुड़ी व एमपी) से 40 से अधिक जुबलेरियन सिस्टर्स मौजूद थीं। पहले दिन शुक्रवार को मुख्य वक्ता प्रफुल बड़ा ने साइको सैक्चुअल इंटीग्रेशन इन-टू स्प्रीचुआलिटी विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने मनोवैज्ञानिक रूप से होने वाले व्यक्तित्व के विकास के क्रम को बताया। 

दूसरे दिन इन्होंने बताया कि किस तरह से अलग-अलग उम्र में विभिन्न प्रकार के मनोवैज्ञानिक समस्याएं आती हैं। इन समस्याओं का उन्होंने समाधान भी बताया। तीसरे दिन आध्यात्मिकता से संबधित जानकारियां दीं और कहा कि मनुष्य के लिए आध्यात्मिकता जरूरी है। इस ओर बढ़ने का मार्गदर्शन भी उन्होंने किया। 

फादर ने जुबली मनाने वाली धर्मबहनों को काउंसलिंग की विधियां भी बतायीं। धर्मसंघ की जनरल सिस्टर लीली ग्रेस टोपनो के मार्गदर्शन में सिस्टर प्रभा खलखो की संयोजिका थीं। संचालन में कार्यक्रम हुआ। सिस्टर ललीता रोशनी लकड़ा व अन्य सिस्टर्स का सहयोग रहा। 

आज 23 धर्मबहनें ध्यान आश्रम कोलकाता में 8 दिनों की आध्यात्मिक साधना के लिए रवाना हुईं। गोल्डन और डायमंड जुबली मनाने वाली धर्मबहनों की आधयात्मिक साधना तीन दिसंबर संतन्ना मूलमत में शुरू हो चुकी है।

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