- ग्रामीणों के विरोध के बावजूद कटी लकडियों को यूपी- बिहार भेजा गया
- लोहरदगा जिले में लकड़ी माफियाओं की दादागिरी
- कुडू के कुंदगडा में काट दिए गए बंदोबस्ती की जमीन पर लगे सैंकड़ों पेड़
- राजनीति संरक्षण प्राप्त लोगों की है सक्रिय सहभागिता
- पूर्व प्रमुख की अगुवाई में ग्रामीण कर रहे हैं विरोध
- जीएम लैंड से पेड़ काटने वालों पर होगी कार्रवाई : डीएफओ सरकार के द्वारा मानती देवी को दिए गए 20 एकड़ 10 डिसमिल
- भूमि से अंचल के द्वारा 2 एकड़ भूमि का अब तक नहीं खोला गया है खाता
- मानती को 92 यूकेलिप्टस पेड़ काटने की अनुमति पर माफिया कर रहे हैं खेला
टीम एबीएन, लोहरदगा। लोहरदगा जिले के कुडू प्रखंड अंतर्गत कुंदगडा गांव के सरकारी जमीन (जीएम) पर लगे यूकेलिप्टस के पेड़ों को काटने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसमें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों के अलावा लकड़ी तस्कर की सहभागिता सक्रिय होने के कारण यह मामला गर्म हो गया है।
जानकारी के मुताबिक लोहरदगा वन विभाग ने कुंदगडा गांव के खाता 117 में स्थित 20 एकड़ 10 डिसमिल भूमि में जो मानती देवी को दो एकड़ जमीन सरकार ने दी थी, उसको रजिस्टर दो में अब तक अंचल कार्यालय द्वारा न तो घटाया गया है, नहीं मानती देवी के नाम से खाता ही खोला गया है।
वावजूद उसे इस इस शर्त के साथ कि उसे तीन गुना पेड़ लगाना है।दो एकड़ जमीन में लगे 92 यूकेलिप्टस पेड़ काटने की अनुमति दी गयी। शुक्रवार तक करीब तीन एकड़ जमीन पर लगे यूकेलिप्टस पेड़ को काटकर राज्य के बाहर भेजा जा चुका है।
क्या कहते हैं डीएफओ
इस मामले में लोहरदगा के डीएफओ अरविंद कुमार ने बताया कि मानती देवी के जमीन पर लगे 92 पेड़ काटने की अनुमति दी गई थी। डीएफओ ने बताया कि ग्रामीणों के विरोध के बाद पेड़ काटने से 25 अक्टूबर को ही मना कर दिया गया था। अगर कोई व्यक्ति जीएम लैंड में लगे पेड़ को काट रहा है, तो यह गलत है। उसके विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि शनिवार को वह खुद मामले की पड़ताल करने के लिए मौके पर जायेंगे। शर्त के मुताबिक 20-20 पेड़ ही काट कर उसका ट्रांसपोर्टिंग करना था, पर अब तक छह बड़े ट्रक से लड़कियों बाहर भेजी जा चुके हैं।
क्या कहते हैं जानकार
इधर, विशेषज्ञों का कहना है कि यूकेलिप्टस की मांग ब्रांडेड प्लाई बोर्ड बनाने वाले कंपनियों के यहां अधिक है बिहार और उत्तर प्रदेश में प्लाई बोर्ड बनाने वाली कंपनियां इसे पांच रुपए किलो के दर से खरीद रही है। मोटा बोटा को चीर कर पतला-पतला बिनियर बनाया जाता है। इसके बाद वॉटरप्रूफ प्लाईवुड में यूकेलिप्टस की लकडियों का उपयोग किया जाता है। बड़ी बात यह है कि इस लकड़ी में घून नहीं लगता है।
ग्रामीणों ने बताया कि यूकेलिप्टस के पेड़ों को काटने के सरकारी आदेश के बाद लोहरदगा में सफेदपोशों और लकड़ी माफियाओं की चांदी हो गयी। सत्तासीन दलों से जुड़े प्रभावशाली लोग भी पूरी तरह सक्रिय हो गये। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विभागीय रवैया से भी लोग नजर है। आये दिन युकेलिप्टस के पेड़ों की आड़ में कई दूसरी प्रजाति के पेड़ भी काट डाले गये।
ताजा मामला कुडू थाना क्षेत्र के कुंदगाड़ा गांव का है जहां बंदोबस्ती की जमीन जो अनाबाद बिहार सरकार के खाते की है, पर लगे यूकिलिप्टस के हरे पेड़ों का कटान धड़ल्ले से किया जा रहा है। आश्चर्यजनक पहलू यह है कि इसकी जानकारी वन समिति के अध्यक्ष- सचिव को तो क्या वहां के गार्ड तक को नहीं दी गयी। पेड़ काटते देख मौके पर पहुंचे गार्ड नितिन टोप्पो ने जब पेड़ काटने का आदेश मांगा तो वन विभाग के बड़े अफसरों से बात करने को कह दिया। हर दिन बेवकूफ होकर पेड़ों के काटने और ट्रांसपोर्टिंग का सिलसिला चला रहा।
पूर्व प्रमुख परिखा मुंडा के नेतृत्व में पहुंचे दर्जनों ग्रामीणों ने पेड़ काट रहे लोगों को बिना आदेश दिखाए पेड़ नहीं काटने की हिदायत देते हुए बैरंग लौटा दिया। जब पेड़ काटने वालों के पास विभाग का आदेश था, तब दिखाया क्यों नहीं गया। क्या वन तस्कर और वन कर्मियों का गठजोड़ इतना मजबूत है कि वो बेखौफ होकर अपना काम कर रहे है। निष्पक्ष जांच होने पर के तथ्य सामने आयेंगे।
निष्पक्ष जांच हुई तो कई लोग होंगे बेनकाब : लाल दिगंबर
एक ओर तो प्रशासन पर्यावरण सरंक्षण करने के लिए प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर हरियाली महोत्सव मनाता है। लाखों पौधे लगाने के संकल्प लिए जाते हैं। वहीं दूसरी ओर धड़ल्ले से वनों का सत्यानाश किया जा रहा है। वन समिति के सदस्य लाल दिगंबर नाथ शाहदेव ने बताया कि वन कर्मचारियों की मिलीभगत से आगे रहकर जंगल के हरे-भरे पेड़ कटवाये जा रहे हैं।
इससे हमारे क्षेत्र का घना जंगल अब मैदान नजर आ रहा है। किसी का ध्यान इस ओर नहीं जाये इसलिए जब पूरा क्षेत्र दुर्गा पूजा मना रहा था। तब माफियाओं ने सैंकड़ों पेड़ काट डाले। इसकी शिकायत हम लोगों ने वन विभाग के बड़े अधिकारियों से की लेकिन कोई कार्रवाई की बात तो दूर हमें ही पाठ पढ़ाया जाने लगा। उन्होंने इसकी जांच की मांग करते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच हुई तो वन तस्करी के खेल में बहुत लोग बेनकाब होंगे।
ढाई लाख से ऊपर के पेड़ों की कटाई के लिए टेंडर का है प्रावधान
बताया जाता है कि ढाई लाख तक के पेड़ की तो साधारण आदेश से कटाई की जा सकती है,परंतु इससे ऊपर की राशि होने पर उसका टेंडर निकाले जाने का प्रवधान है। लेकिन यहा ऐसा कुछ नहीं हुआ है। पेड़ काटने की अनुमति वन विभाग की तरफ से दी जाती है। नियमत: पेड़ों की मोटाई के आधार पर यह मंजूरी होती है।
यदि इमारती लकड़ी है, तो उसके परिवहन के लिए टीपी विभाग जारी करता है। इन सब के अलावा एक पेड़ को काटने के स्थान पर तीन पौधे लगाने का प्रावधान है। ग्रामीणों का कहना है कि रासूखदार लोग लकड़ी के अवैध धंधे को विभागीय अधिकारियों से मिलीभगत कर दमदारी से अपने लोगों से चला रहे हैं।
वन विभाग के पास आम आदमी के लिए कई शख्त नियम
वन विभाग से एक खतरनाक पेड़ की शाखा को काटने की मंजूरी लेने में महीनों या साल लग जाते हैं। माफियाओं के अलावा पेड़ काटने या उसे गिराने से संबंधित आवेदन को एक दर्जन से अधिक साहब से क्लियर कराना होता है और अगर आपत्तियां होती हैं, तो इसमें वर्षो भी लग जाते हैं।
जानकारों की माने तो आवेदन मिलने पर पहले उन पेड़ों की तस्वीरों के साथ रिपोर्ट तैयार की जाती है। फिर क्षेत्र का दौरा करने के बाद पेड़ की स्थिति का निरीक्षण किया जाता है। और अधिकारियों से फील्ड निरीक्षण कराने में महीनों लग जाते हैं। लेकिन यहां तो गार्ड तक को खबर नहीं है।
क्या कहते हैं कुडू प्रखंड प्रमुख
कुडू प्रखंड के पूर्व प्रमुख परीखा मुंडा ने आरोप लगाया है कि वन प्रमंडल अधिकारी लोहरदगा ने मानती देवी पति स्व बिल्टू भुइयां ग्राम कुंदगडा के आवेदन पर खाता नंबर 80 प्लॉट नंबर 40 रकवा दो एकड़ भूमि में अवस्थित 92 यूकेलिप्टस पेड़ 20-20 कर काटने और इसके जगह पर दूसरा 300 पौधा आरोपित करने का परमिशन 19 अक्टूबर को दिया है। लेकिन लकड़ी माफियाओं ने वन विभाग की मिली भगत से वन विभाग बिहार सरकार हल्का नंबर दो, मौजा 10 जिसका क्षेत्रफल 20 एकड़ 10 डिसमिल जमीन में लगे यूकेलिप्टस का पेड़ धड़ले से काट रहे हैं।
शुक्रवार को भी ग्रामीणों ने विरोध किया लेकिन वन तस्कर दादागिरी में काट रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकारी भूमि का पेड़ काटता है तो वन विभाग इस पेड़ का नीलामी कराकर बचेगा। जिसका राजस्व सरकार को मिलेगा। लेकिन तस्करों ने पेड़ काटकर और बेचकर अपनी जेब गरम कर सरकारी राजस्व का चूना लगा रहे है। उन्होंने इस मामले को लेकर डीसी से लेकर सरकार तक जाने की बात कही है। और इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।