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कोडरमा : जेपी हॉस्पिटल में नहीं हुआ कोरोना के किसी मरीज का इलाज, दावा ठोंका 41 लाख का...

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कोडरमा : जेपी हॉस्पिटल में नहीं हुआ कोरोना के किसी मरीज का इलाज, दावा ठोंका 41 लाख का...
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कोडरमा। झुमरीतिलैया के चित्रगुप्त नगर स्थित जयप्रकाश हॉस्पिटल में कोविड का एक भी मरीज का ईलाज नहीं किया गया और 41 लाख का दावा ठोका गया है। बताते चलें कि कोविड के आरंभिक दौर में उक्त अस्पताल का अधिग्रहण जिला प्रशासन के द्वारा डेडिकेटेड कोविड अस्पताल के रूप में किया गया था। आइसीयू, वेंटिलेटर जैसे जरूरी संसाधनों की घोर कमी के उस दौर में उक्त अस्पताल में दो वेंटिलेटर और आइसीयू की सुविधा को देखते हुए प्रशासन ने उक्त अस्पताल का अधिग्रहण तीन माह के लिए किया था। लेकिन अस्पताल प्रबंधन का रवैया असहयोगात्मक होने के कारण यहां एक भी मरीज का इलाज नहीं हो सका। अस्पताल के सारे स्टॉफ भाग खड़े हुए। एकबार गंभीर हालत में एक मरीज को यहां वेंटिलेटर सपोर्ट के लिए लाया गया, लेकिन किसी तरह का इलाज नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई। बाद में अस्पताल प्रबंधन पर कठोर कार्रवाई भी की गई। अस्पताल के संचालकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई और दो माह के लिए अस्पताल का लाइसेंस भी सस्पेंड किया गया। अब अस्पताल प्रबंधन ने वर्ष 2020 में कोविड में अस्पताल अधिग्रहण को लेकर 41.74 लाख का दावा ठोंका है। अस्पताल प्रबंधन ने जिला प्रशासन से 7 अप्रैल 2020 से 30 जून 2020 तक स्टॉफ खर्च का ब्योरा देते हुए राशि भुगतान करने को कहा है। इसमें दवाई खर्च, डॉक्टर व कर्मियों का वेतन, अस्पताल का बैंक लोन का ईएमआइ, मंथली इनकम, इलेक्ट्रिक बिल, डीजल, आक्सीजन सहित अन्य खर्च शामिल है। इधर, प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन के दावा को खारिज कर दिया है। जयप्रकाश हॉस्पिटल के दावा पर जनशिकायत कोषांग के नोडल पदाधिकारी ने कहा है कि अस्पताल द्वारा अधिग्रहण के दौरान असयोगात्मक रवैया अपनाया गया। आपदा प्रबंधन समिति की बैठक एवं सिविल सर्जन के पत्र का हवाला देते हुए कहा है कि 2 दिसंबर 2020 को संबंधित अस्पताल का निबंधन तक रद्द किया गया। इधर, अस्पताल प्रबंधन द्वारा खर्च का ब्यौरा तो प्रस्तुत किया गया, लेकिन कितने मरीजों का इलाज किया गया, इस संबंध में जानकारी नहीं दी गई। कोविड के पहले फेज में जब स्थिति चिंताजनक थी, तब जिले का एकमात्र निजी अस्पताल होली फैमिली में मरीजों को अच्छी सेवा दी गई। अस्पताल कर्मियों का बेहतर योगदान के कारण सैकड़ों मरीजों की जान तक बचाई गई। लेकिन इस सेवा के बाद भी इस अस्पताल प्रबंधन को कर्मियों व चिकित्सकों के मंथली सैलरी लेने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। करीब एक वर्ष बाद डेढ़ करोड़ का भुगतान किया गया है। जबकि शेष राशि का भुगतान उपयोगिता प्रमाण पत्र देने के बाद करने की बात कही गई है।
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