कस्तूरबा मुख्यमंत्री एक्सीलेंट स्कूल में कार्यशाला का हुआ आयोजन
टीम एबीएन, लोहरदगा। स्कूल आफ एक्सीलेंस कस्तूरबा विद्यालय में बुधवार को रैफ ने जागरूकता अभियान चलाते हुए छात्राओं को जागरूक किया। मौके पर रैफ के गौतम मित्रा ने कहा कि बेटी पढ़ाओ बेटी बचाव योजना से आपलोग परिचित होंगे। बेटियों के जीवन को बचाने और उन्हें पढ़ाने के लिए पूरे भारत में यह अभियान चलाया जा रहा है।
भारत सरकार द्वारा जागरुकता फैलाने के साथ-साथ लड़कियों के कल्याण, सेवाओं की क्षमता में सुधार लाने के लिए यह चलायी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के अन्तर्गत सुकन्या समृद्धि योजना (21 जनवरी 2015) को शुरू किया था।
सुकन्या समृद्धि योजना इस अभियान का समर्थन करने के साथ ही बेटी पर आवश्यक खर्ची स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा और शादी आदि को सफलता पूर्वक पूरा करने के लिए शुरू की गयी है। बेटियों के जीवन के लिए ये योजना एक अच्छी पहल है।
गृह मंत्रालय ने इस योजना के तहत बड़े शहरों में भी महिलाओं और लड़कियों की सुरक्छित करने के लिए 150 करोड़ रुपये खर्च करने की योजनाय बनायी है। इस योजना का निर्माण और प्रारंभ बेटियों से संबंधित कुछ भयंकर सामाजिक मुद्दों के स्तर और प्रभाव को कम करने के लिए किया गया है।
लड़कियों की संख्या में बड़ी गिरावट देश में महिला सशक्तिकरण की कमी का सूचक है। लड़कियों की संख्या में भारी कमी के मुख्य कारण जन्म से पूर्व भेदभाव, चयनात्मक लिंग आधारित परीक्षण, लैंगिक असमानता, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार आदि सामाजिक मुद्दे हैं।
बेटियों के जीवन की रक्षा सुरक्षा और उच्च शिक्षा को सुनिश्चित करना। उच्च शिक्षा और सभी कार्यक्षेत्रों में समान भागीदारी के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को सुनिश्चित करना है। ये कार्यक्रम समाज में लड़कों के समर्थन में सामाजिक पक्षपात को हटाने के साथ-साथ लड़कियों की सुरक्षा और शिक्षा के माध्यम से उनके स्तर में सुधार करने के लिए शुरू किया गया है।
यह योजना तभी सफल हो सकती है जब ये हमारे द्वारा समर्थित हो। हमेशा के लिए लड़कियों के प्रति नजरिया और मानसिकता बदलने की आवश्यकता है। लोहरदगा के कस्तूरबा मुख्यमंत्री एक्सीलेंट स्कूल के छात्राओं को प्रशिक्षण दिया की बेटियां भी किसी से कम नहीं होती है और हथियार चलाना, से लेकर बड़े बड़े हथियार भी चला सकती है।
लड़कियों के मन से डर भय को समाप्त करना उद्देश्य है ताकि ज्यादा से ज्यादा संख्या में लड़कियां भी सेना, पुलिस और सीआरपीएफ में बहाल होकर देश सेवा कर सके।