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झारखंड

गीता श्रेष्ठ विद्या और ब्रह्म रूप है : समीर उरांव

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गीता श्रेष्ठ विद्या और ब्रह्म रूप है : समीर उरांव
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  • भव्य समारोह में गीता महात्म्य का नागपुरी अनुवाद और राजेंद्र प्रताप देव द्वारा लिखित गीता महातम का विमोचन
  • 200 लोगों को नि:शुल्क दिये गये पुस्तक

टीम एबीएन, लोहरदगा। श्री गीता जी को वेदों और उपनिषदों का सार माना जाता हैं, जो लोग वेदों को ज्ञान प्राप्त करने में असमर्थ है, वह गीता को पढ़कर भी ज्ञान की प्राप्ति कर सकते है। गीता श्रेष्ठ विद्या और ब्रह्म रूप है।गीता महात्म्य के झारखंड में नागपुरी अनुवाद गीता कर महात्म्य समेत पुस्तक का रविवार को विमोचन करने के बाद समारोह को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद समीर उरांव कही।

वह आराहांसा गांव के 88 वर्षीय लाल राजेंद्र प्रसाद देव द्वारा नागपुरी में अनुवादित और लिखित गीता महात्म्य का अन्य अतिथियों के साथ विमोचन करने के बाद लोहरदगा के महादेव टोली स्थित देवकुंज में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि लाल राजेंद्र प्रताप देव ने झारखंड और इस क्षेत्र की जनभाषा नागपुरी में गीता महात्म्य लिखकर न केवल गीत के भाषा को सरल ढंग से प्रस्तुत किया है, बल्कि जिन्हें संस्कृत और हिंदी समझने में कठिनाई महसूस करते हैं। उन्हें गीता महात्म्य को सरलता बताने का काम किया है। हम उनके इस कृति के लिए उन्हें धन्यवाद देते हैं। 

सांसद श्री भगत ने कहा कि गीता हमारे जीवन के तमाम आयाम का वैज्ञानिक प्रबंधन सीखना है उन्होंने हनुमान चालीसा के चौपाई का उदाहरण देते हुए कहा कि हमें अपने ज्ञान विज्ञान को जानने के लिए सूक्ष्म रूप से लेकर विराट रूप में प्रकट होने की विधा बताता है।

नागपुरी भाषा में गीता को अनुवाद कर पुस्तक लिखने वाले लाल राजेंद्र प्रताप देव ने इस मौके पर कहा कि गीता न सिर्फ जीवन का सही अर्थ समझाती है, बल्कि परमात्मा के अनंत रूप से हमें रुबरु कराती है। इस संसारिक दुनिया में दुख, क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या आदि से पीड़ित आत्माओं को गीता सत्य और अध्यात्म का मार्ग दिखाकर मोक्ष की प्राप्ति करवाती है।

विशिष्ट अतिथि पूर्व विधान पार्षद प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि गीता का अध्ययन तो हमने नहीं किया है, पर श्रवण किया है। उसे यह सिख मिलता है, की हमें कर्म करना चाहिए, फल की चिंता नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि गीता को वेदों और उपनिषदों का सार माना जाता हैं, जो लोग वेदों को ज्ञान प्राप्त करने में असमर्थ है, वे गीता को पढ़कर भी ज्ञान की प्राप्ति कर सकते हैं।

गुमला के पूर्व विधायक शिव शंकर उरांव ने कहा कि गीता न सिर्फ जीवन का सही अर्थ समझाती है बल्कि परमात्मा के अनंत रूप से हमें रुबरु कराती है। इस संसारिक दुनिया में दुख, क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या आदि से पीड़ित आत्माओं को गीता सत्य और आध्यात्म का मार्ग दिखाकर मोक्ष की प्राप्ति करवाती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद मदन मोहन पांडेय ने कहा की सब विचारों से भरा व्यक्तित्व हमेशा समय का सदुपयोग करता है। उसका अनुपम उदाहरण लाल राजेंद्र प्रसाद देव ने गीता के नागपुरी संस्करण लिखकर किया है धरती छोड़ने से पहले हर सदविचार वाले व्यक्ति को ऐसा कर्म करना चाहिए जो भविष्य की कृति बना रहे। स्वागत भाषण रामचंद्र गिरी और धन्यवाद ज्ञापन सामाजिक कार्यकर्ता बलबीर देव ने किया।

मौके पर अन्य लोगों के अलावा कार्यक्रम में भिखारी भगत, पूर्व प्रिंसिपल प्रो परमानंद प्रसाद, राजकिशोर महतो, दिलीप देव, डॉ एसएन सहाय, डॉ टी साहू, अजय कुमार पंकज, पारस पांडेय, वीके बालान्जिनप्पा, परमेश्वर साहू, लाल कृष्ण नाथ शाहदेव, विश्वजीत शाहदेव, विनोद राय, परमेंद्र सिंह, धनेश्वर महतो, राजेश्वर पांडेय, रामविलास सिंह, नागेंद्र सिंह, सेनगुप्ता, नंदलाल महतो, समेत बड़ी संख्या में शहर के प्रबुद्ध नागरिक और गीता प्रेमी मौजूद थे।

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