- असस्लातो वसस्लामो अलैका या रसूल अल्लाह के नारों से गुंजायमान हुआ शहर
- देश में शांति, सौहार्द एवं समृद्धि के लिए मांगी गई दुआएं
- सुरक्षा की चाक- चौबंद की गई थी व्यवस्था
टीम एबीएन, लोहरदगा। लोहरदगा और आसपास के इलाके में गुरुवार को इस्लाम धर्मावलंबियों ने पैगंबर मोहम्मद साहब की जन्मजयंती उल्लास, उमंग और भरोसे के साथ मनाया। मौके पर हजरत मोहम्मद साहब की शान में लोहरदगा शहर समेत जगह-जगह जुलूस निकल गये। हुज़ूर के शान में हौसले के साथ नारे बुलंद की। पूरे जिले में ईद मिलादुन्नबी का त्यौहार सौहार्द के साथ मनाया गया।
जुलूस की निगरानी और सुरक्षा के लिए बड़ी तादाद में सुरक्षा बल को लगाया गया था। चौक चौराहों में पुलिस अधिकारी और स्टेटिक मजिस्ट्रेट तैनात किये गये थे। पुलिस कप्तान हारीश बिन जमा, सिविल एसडीओ अरविंद कुमार लाल डीएसपी मुख्यालय परमेश्वर प्रसाद समेत तमाम इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर जुलूस पर पैनी निगाहें रखे हुए थे।
बारावफात या ईद मिलादुन्नबी के दिन पैगम्बर मोहम्मद साहब का जन्म हुआ था। इत्तेफाक से इसी दिन उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। इसलिए ये दिन बारावफात के नाम से भी जाना जाता है। बारावफात, ईद और बकरीद के अलावा मुस्लिमों का एक मुख्य त्योहार है। ईद ए मिलादुन्नबी कहा जाता है। यह मुसलमानों के लिए एक बेहद खास दिन माना जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के तीसरे महीने रबिउलअव्वल की 12 तारीख को मनाये जाने वाले इस त्योहार की अपनी अहमियत है।
इस दिन आखिरी नबी और पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब का जन्म हुआ था। इसलिए मुस्लिम समुदाय के लोग इस दिन जश्न मनाया। मिठाइयां बांटें। जुलूस निकालते। ईद मिलादुन्नबी इस्लाम के इतिहास का सबसे अहम दिन माना जाता है।
ईद मिलादुन्नबी के मौके पर लोग रात भर जागकर मस्जिदों में पैगम्बर द्वारा दी गई कुरआन और दीन की तालीम का जिक्र किया। मस्जिदों में तकरीर कर पैगम्बर के बताए गए रास्ते और उनके आदर्शों पर चलने की सलाह दी गयी।
मिलादुन्नबी के साथ इसलिए कहते हैं बारावफात ईद मिलादुन्नबी के साथ-साथ इस दिन को बारावफात भी कहा जाता है। क्योंकि इस दिन पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन के साथ वफात (मौत) भी हुई थी।
पैगम्बर-ए-जहां हजरत मोहम्मद साहब के जन्म दिवस के मुबारक मौके पर गुरुवार को शांति और सौहार्द के साथ इस्लाम धर्मावलंबियों ने जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के रूप में मनाया।
मौके पर अंजुमन इस्लामिया के तत्वावधान में जुलूस- ए-मोहम्मदी भी निकाली गयी। जिसका नेतृत्व मसाजिदों के आलेमा-ए- कराम और अंजुमन इस्लामिया के ओहदेदरानों और विभिन्न पंचायतों के सदर व सेक्रेटरी कर रहे थे।
हरे रंगों के परचम और खुबसूरत रंग-बिरंगे पताके हाथों में लिए जनसैलाब के रूप में मुस्लिम समुदाय स्थानीय जामा मस्जिद के समीप से होते हुए बड़ा तालाब, बगडू रोड़, तैगी नगर, अमला टोली, सोमवार बाजार, पावरगंज, बाबा मठ, न्यू रोड, महात्मा गांधी पथ, गुदरी बाजार, शास्त्री चौक, तेतर तर, थाना रोड समेत विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए पुन: जामा मस्जिद के पास पहुंचे।
यहां सलाम के बाद जिला समेत देश में शांति, सौहार्द तरक्की की दुआओं के साथ जुलूस का समापन हुआ। इस दौरान असस्लातो वसस्लामो अलैका या रसूल अल्लाह जैसे नारों से पूरा शहर गुंजायमान होता रहा।
विभिन्न चौक-चौराहों पर जुलूस का इस्तकबाल भी किया गया। जुलूस में अंजुमन इस्लामिया के सदर अफसर कुरैशी, सचिव सफदर आलम, सह सचिव मोजम्मिल अंसारी, अंजुमन इस्लामिया जेनरल काउंनसिल के नाजिम ए-आला जब्बार, सैय्यद खालिद शाह, इकबाल, शाहिद अहमद बेलू, शमशेर खान, मनव्वर, मोशव्वीर, कारी शाहीद, परवेज आलम, मौलाना रेयाजउद्दीन, कारी कलिमुल्ला, मुर्तूजा खलीफा अब्दुल रउफ अंसारी, इम्तेयाज खान, टुन्ना, इब्राहिम अशरफी, फिरोज राही, हाशिम सुलेमानी, हिफजुर्रहमान कमाली, शकिल खान, शकील अहमद, जामा मस्जिद के इमाम मौलाना कारी शमीम अहमद रिजवी, कुरैशी मस्जिद के इमाम मौलाना अशदक के अलावा विभिन्न मदरसों के नाजिम आदि के अलावा बड़ी संख्या में लोग शामिल थे।
जुलूस ए मोहम्मदी में शामिल हजरत मोहम्मद के दीवानों को शर्बत, फल, खजूर, चना, चॉकलेट और पानी पिला कर स्वागत किया गया। कहा गया कि ऐसे नेक अवसर पर जुलूस में शामिल लोगों को खिदमत करने में सबाब मिलता है। इस कार्य में शामिल मुस्लिम युथ वेकफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष मोन्टी खान, पिक्कू खान, जवेद खान, समेत तमाम मेम्बर्स शामिल थे।
स्वयं मॉनेटरिंग कर रहे थे एसपी, एसडीओ व डीएसपी
जश्न-ए-ईद मिलादुन नबी के जूलूस को लेकर जिले के पुलिस-प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे। हर चौक-चौराहों पर दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी एवं सुरक्षा के जवान तैनात किये गये थे।
किसी भी अनहोनी को लेकर पुलिस कप्तान हारिस बिन जमां, एसडीओ अरविंद कुमार लाल व डीएसपी परमेश्वर प्रसाद, सीओ, बीडीओ, थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अनिल उरांव आदि लगातार पेट्रोलिंग करते नजर आये। समाचार लिखे जाने तक किसी प्रकार की कोई अनहोनी की सूचना नहीं है।