अहंकार का त्याग ही मार्दव धर्म है : जैन मुनि
टीम एबीएन, झुमरी तिलैया। जैन धर्म के श्रद्धालु भक्तों ने आत्म शुद्धि का महापर्व 10 लक्षण पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन बड़े ही भक्ति और श्रद्धा के साथ उत्तम मार्दव धर्म मनाया। झुमरी तिलैया में चातुर्मास कर रहे परम पूज्य अध्यात्म योगी मुनि श्री 108 सुयश सागर मुनिराज ने कहा कि जिसका पता नहीं उस पर अहंकार मत करो।
अहंकार का त्याग ही मार्दव धर्म है। मनुष्य का जीवन हर समय एक जैसा नहीं रहता है। संपन्न व्यक्ति की भी आयु, बल, ज्ञान सुंदरता, पैसा, ख्याति, कब खत्म हो जाये कोई नहीं जानता व्यक्ति इसी अहंकार में धोखा खाता है। रावण के सोने का महल और उसका जीवन भी अहंकार के कारण खत्म हो गया।
पूज्य गुरुदेव सुयश सागर ने कहा कि जिसका अपने पास सदैव रहने का पता नहीं उस पर अहंकार मत करना। जीवन में जो झुकता है वही जीतता है। अकड़ने वाला हमेशा हारता है। यह जीवन क्षणभंगुर है। कब बुलावा आ जाये कोई नहीं जानता। इसलिए अपने पद, ज्ञान, रूप, जाति, संपत्ति पर अहंकार नहीं करना चाहिए।
अपने जीवन में किसी का भी अपमान नहीं करना चाहिए। जिसका हमें पता ही नहीं वह कब नष्ट हो जायेगा उस पर अभिमान नहीं करना चाहिए कि वह रहेगा कि नहीं रहेगा। बंजर भूमि में बीज डालने पर वह बेकार हो जाता है। इस प्रकार मनुष्य के मन में अहंकार है तो उसका जीवन बेकार है। प्रात: ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु भक्तजन मंदिर में पहुंचकर पूजा ध्यान में लीन हो गये।
परम पूज्य गुरुदेव सुयश सागर जी ने विश्व शांति मंत्र के साथ भक्तों को भगवान के मस्तक पर शांतिधारा अभिषेक कराया। जैन समाज के सुबोध जैन गंगवाल ने अपने संगीत और भजनों से श्रद्धालुओं को आनंदित कर दिया।
नया मंदिर में प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा कैलाश-अनिल कासलीवाल, बड़ा मंदिर जय कुमार-मनीष गंगवाल, श्री विहार राकेश -आदित्य छाबड़ा, शांतिधारा कमल-राजीव छाबड़ा, स्वर्ण कलश से नंद किशोर हेमंत बड़जात्या को सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह जानकारी जैन समाज के मीडिया प्रभारी नवीन जैन राजकुमार अजमेरा ने दी।