रांची। वाईएमसीए रांची ने सोमवार को ओल्ड एचबी रोड स्थित वाइएमसीए सिटी ब्रांच के प्रांगण में सर्व धर्म सम्मेलन के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सेवा ही धर्म है इस विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में ईसाई धर्मगुरु पादरी निरल बागे ने सभा को संबोधित किया कहा कि बाइबल बताता है कि यह सी मशीनें कंगालूम की सेवा की बंदी गृह में बड़े लोगों की सेवा की और असहाय एवं समाज से बहिष्कृत और परिष्कृत तिरस्कृत लोगों की सेवा करने को कहा हमें भी यीशु मसीह के समान अपने जीवन में शोषित असहाय लोगों की सेवा करनी चाहिए। मुस्लिम धर्मगुरु जमात उलेमा ए हिंद झारखंड राज्य के महासचिव हजरत मौलाना डॉ मो असगर मिस्बाही ने कहा कि जितने भी पैगंबर इस दुनिया में आए सब ने इंसानियत के लिए कार्य किया इंसानों के काम आना उनके दरमियान नफरत नहीं फैलाना गरीब और मजबूर लोगों को सहारा देना यह काम हमारा होना चाहिए उन्होंने कहा कि नफरत के माहौल को खत्म करना और मोहब्बत एवं आपसी भाईचारा का संदेश देना चाहिए जो आज तक वाईएमसीए करते आ रहा है। आर्य समाज के उपदेशक धर्मगुरु अशोक कुमार पाठक ने अपने संदेश में कहा कि हम इंसानों को 5 कार्यों को अवश्य करना चाहिए जिसमें ईश्वर को याद करना देव यज्ञ करना, अतिथि सत्कार करना अपाहिज कुत्ते और चांडाल लोगों की भी सेवा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों का उपकार करना ही सेवा है। मुक्ति प्राप्ति के सब साधनों में सबसे सशक्त संसाधन परोपकार है। एमसीए वाईएमसीए रांची के महासचिव जॉन जॉन हास कुजूर ने कहा कि वाईएमसीए रांची की स्थापना वर्ष इन 1969 में हुई, जिसका मुख्य उद्देश्य गरीब कमजोर निस्सहाय लोगों के बीच शिक्षा स्वास्थ्य एवं उनके अधिकार और कर्तव्य के प्रति लोगों में जागृति लाना और सेवा करना है शिक्षा के क्षेत्र में 2000 से अधिक गरीब बच्चों को वर्ग नर्सरी से स्नातकोत्तर तक की नि:शुल्क शिक्षा दी जा दी गई है जो अभी सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों में कार्यरत हैं इस सम्मेलन में 150 से अधिक स्थानीय कमेटी महिला मंडल युवा एवं गृहिणी के सदस्यगण उपस्थित हुए। कार्यक्रम का संचालन प्रोग्राम कोआॅर्डिनेटर मो मिनहाज ने किया। उन्होंने इस कार्यक्रम में आए सभी धर्म गुरुओं एवं प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत अभिनंदन पुष्प कुछ देकर किया। वाईएमसीए के सेक्रेटरी आशीष तो अपनों ने सभी धर्म गुरुओं के वक्तव्य के प्रति आभार व्यक्त किया एवं उनका साधुवाद किया कार्यक्रम को सफल बनाने में मुमताज कुरैशी का महत्वपूर्ण योगदान रहा।