टीम एबीएन, झुमरी तिलैया। 10 लक्षण धर्म का महापर्व के पहला दिन आज उत्तम क्षमा धर्म के रूप में दोनों मंदिरों में बड़े भक्ति और उल्लास पूर्वक धूमधाम से मनाया गया। सर्वप्रथम प्रात:दोनों मंदिरों में भगवान की शांतिधारा और कलश जैन समाज के सैकड़ों पुरुष बच्चों ने किया।
महिलाओं ने केसरिया वस्त्र में विधान भक्ति पूजन पाठ किया। चातुर्मास संयोजक नरेंद झांझरी ने मंच संचालन किया। पंडित अभिषेक शास्त्री ने विधान और पूजा का कार्य कराया। जैन संत गुरुदेव सुयश सागर जी के मुखारविंद से लाखों मंत्रों से युक्त भगवान की शांतिधारा का पाठ किया गया।
जैन संत सुयश सागर जी ने उत्तम क्षमा धर्म पर प्रकाश डालते हुए अपनी अमृतवाणी में श्रद्धालु भक्तों को कहा कि विश्व शांति के लिए जैन धर्म की क्षमा धर्म अपनाना आवश्यक है। आज पूरा विश्व बारूद की ढेर पर है क्षमा धर्म को अपना कर ही राष्ट्र समाज और परिवार शांति स्थापित कर सकता है।
क्षमा वीरों का आभूषण है, क्षमा कर्मठता का प्रतीक है यह कमजोरो की नहीं सामर्थ्यवान की संपत्ति है। सहनशील व्यक्ति ही क्षमा प्रदान कर सकते हैं। धरती और वृक्ष क्षमा का प्रतीक है। आप कितना ही गलती करें, यह आपको हमेशा अपनी गोद में रखने का और फल देने का कार्य करते हैं।
अपने जीवन को हमेशा फलदार बनाइये बलदार नहीं। अंतरंग की कलुस्ता को समाप्त करने का नाम ही क्षमा है। अपनी अच्छाइयों को हमेशा पत्थर पर लिखें बुराइयों को पानी पर लिखें, क्षमा रुपी धर्म को अंगीकार करके ही व्यक्ति मानसिक तनाव से दूर रहकर शांति को प्राप्त कर सकता है।
आज प्रात: नया मंदिर में भगवान की शांति धारा करने का सौभाग्य सुरेश-नरेंद्र झांझरी के परिवार को मिला। डॉक्टर गली बड़ा मंदिर में मूल वेदी भगवान पारसनाथ का शांति धारा करने का सौभाग्य बिनोद गंगवाल परिवार को ओर दूसरी प्रतिमा का अजित गंगवाल को मिला एवं सरस्वती भवन में भगवान का श्री विहार कर कार्यक्रम स्थल पर गाजे बाजे के साथ किया गया।
जिसका सौभाग्य अजय-प्रशम सेठी को प्राप्त हुआ साथ ही कार्यक्रम स्थल पर पांडुकशीला पर श्री 1008 महावीर भगवान की प्रतिमा पर प्रथम अभिषेक ओर शांतिधारा का सौभाग्य मिला दूसरी ओर से स्वर्णमई कलश से शांतिधारा का सौभाग्य जैन पदम कुमार सेठी को प्राप्त हुआ। रात्रि में भव्य आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा यह सभी जानकारी जैन समाज के मीडिया प्रभारी नवीन जैन राजकुमार अजमेरा ने दी।