झारखंड
बाबा साहब का संघर्ष हर पीढ़ी के लिए एक मिसाल बना रहेगा : सुनीता सिंह
ABN Bureau
•
04 Dec, 2021
•
14 मिनट में पढ़ें
5 Views
विज्ञापन
रांची। भारत रत्न बाबा साहब भीमराव अंबेडकर एक महान योद्धा, नायक, विद्वान, एक मनीषी दार्शनिक, वैज्ञानिक, समाजसेवी, संविधान के शिल्पकार और धैर्यवान व्यक्तित्व थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देश के कल्याण कामना में लगा दिया। उनका जीवन पूरे मानव जाति के लिए समर्पित रहा। वे विश्व भर के दलित, शोषित, वंचित और उपेक्षित सब के लिए आशा की किरण थे। वे सिर्फ दलितों के मसीहा ही नहीं थे, वे हर अमानवीय घटना के खिलाफ आवाज उठाने वाले महापुरुष थे। हर शोषित ,पीड़ित दबे- कुचले की आवाज थे। उन्हें सिर्फ भारत की सीमाओं में बांधना ठीक नहीं होगा। मानवता में जिनको भी विश्वास है, उन सब के लिए वे मानवीय मूल्यों के रखवाले थे। उक्त बातें भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुनीता सिंह ने कही। वह बाबा साहेब के महापरिनिर्वाण दिवस की तैयारी को लेकर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।
6 दिसंबर को भीमराव अंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस है और उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए हम सबके मन में हमेशा एक सवाल उठता रहा है कि आजादी के इतने वर्षों बाद और उनके निधन के 60 वर्षों बाद तक देश की सत्ता में सबसे अधिक वर्षों तक काबिज कांग्रेस पार्टी ने ऐसे महान पुरुष की याद में कुछ भी क्यों नहीं किया? हम जानते हैं, इसका जवाब कांग्रेस के पास नहीं है। यह बात सत्य है कि बाबा साहब अपने जीते जी सामाजिक छुआछूत के शिकार थे और मरने के बाद भी राजनीतिक छुआछूत के शिकार हुए।
ठीक इसके विपरीत हम सबों को मोदी सरकार को धन्यवाद देना चाहिए कि 2014 में मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही बाबा साहब अंबेडकर के कामों को, उनके विचारों को, सहेजने, समेटने और विश्व पटल पर लाने का काम लगातार कर रही है। 14 अप्रैल 21 को बाबा के जीवन पर आधारित 4 किताबों का विमोचन करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक गरीब मां का बेटा, अति पिछड़े समाज से आने वाला व्यक्ति, आज देश का प्रधानमंत्री है, तो यह बाबा साहब की देन है। बाबा का जन्म मध्यप्रदेश के महू में शुभेदार रामजी शकपाल एवं भीमाबाई की 14 वीं संतान के रूप में हुआ था। यह सच है कि देश में सरदार वलभ्भ भाई पटेल जी ने राजनीतिक बिखराव को समेटते हुए राजनीतिक एकीकरण का काम किया था, तो भीमराव अंबेडकर जी ने राजनीतिक संवैधानिक व्यवस्था के माध्यम से सामाजिक एकीकरण का बीड़ा उठाया था। लेकिन इन दोनों ही महापुरुषों को उनके मान-सम्मान से वंचित रखा गया। मोदी सरकार ने बाबा साहब से जुड़ी पंचतीर्थ के वर्षों -वर्षों से लंबित पुराने फाइलों को निकालकर उस काम को पूरा करके दिखाया। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को इतना मान सम्मान और श्रद्धांजलि किसी दूसरी सरकार ने नहीं दी, जो मोदी सरकार ने दी है। मोदी सरकार द्वारा भारतीय इतिहास में बाबा साहब को वह दर्जा देने की कोशिश की जा रही है, जिसके वे हकदार थे। उनकी याद में पंचतीर्थ का निर्माण किया गया। उनका जन्म स्थल मध्य प्रदेश के मऊ में बीजेपी की सरकार ने भव्य स्मारक बनाया। लंदन जहां उन्होंने शिक्षा पाई थी, उस जगह को तीर्थ के रूप में विकसित किया गया। मुंबई में इंदु मिल की जगह पर एक भव्य स्मारक बनाया गया। नागपुर में भी उनकी याद में स्मारक बनाया गया। 14 अप्रैल 2018 को पीएम नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में उनके स्मारक के उद्घाटन के समय कहा कि यह स्थान, यह तीर्थ सिर्फ ईंट और गारे की इमारत पर नहीं है, बल्कि जीवंत संस्थाएं हैं। विचार के सबसे बड़े संस्थान हैं। इमारत भव्य भी है और इमारत दिव्य भी है। मोदी सरकार की पहल पर 125 सालों में पहली बार यूनाइटेड नेशन में उनकी जन्म जयंती मनाई गई। पहली बार दुनिया के 102 देशों में उनकी जयंती मनाई गई। और पहली बार देश की संसद में बाबा साहब पर दो दिवसीय चर्चा हुई। जनधन खातों की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश बाबासाहेब आंबेडकर के कदमों पर चलते हुए तेजी से गरीब, वंचित, शोषित, पीड़ित सभी के जीवन में बदलाव ला रहा है। बाबा साहब की जयंती पर पी एम द्वारा देश के लिए स्वास्थ्य योजना में से एक आयुष्मान भारत योजना को लांच किया गया।बाबा साहब की 126 जयंती पर पीएम नरेंद्र मोदी के द्वारा नागपुर में भीम ऐप को आधार कार्ड से जोड़कर लांच किया गया। मोदी सरकार ने दलितों के अधिकार के लिए बनाए गए कानून को और भी मजबूत बनाया।और अत्याचार को रोकने के लिए कानून को और भी सख्त किया।
शिक्षित बनो, संगठित बनो, और संघर्ष करो - बाबा साहब का नारा 21 वीं शताब्दी के लिए भी मुख्य बातें हैं ।समाज के आखिरी छोर पर बैठे लोगों को शिक्षित करना है, जो अभी भी वंचित है। 100% साक्षरता को हमें देश में प्राप्त करना है और इसके लिए मोदी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने श्रमिकों के श्रम के 12- 14 घंटे को कम कर 8 घंटे करने में बड़ी भूमिका निभाई। लेबर लॉ की फाउंडेशन के रचयिता बाबा साहब थे ।भारत की संघीय ढांचा को मजबूत करने के लिए उन्होंने एक स्वतंत्र फाइनेंस कमीशन की रचना की। लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनाव की गारंटी के लिए इलेक्शन कमिशन की व्यवस्था दी। महिलाओं को ससक्त बनाने के लिए अनेक कदम उठाएं। दुनिया के धनवान देश, प्रगतिशील देश, लोकतंत्र की दुहाई देने का मोनोपोली रखने वाला देशों में भी महिलाओं को 50 -50 सालों तक मताधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ा, लेकिन एक दलित मां के कोख से पैदा हुए बेटा ने भारत में संविधान के पहले दिन से ही भारत की महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिया। महिलाओं को मजबूत बनाने के लिए हिंदू कोड बिल को लाया ।महिलाओं को कोयले की खान में काम करने से मुक्ति दिलायी। बाबा साहब ने संपत्ति में महिलाओं के अधिकार की बात उठायी।और जब उस समय की तत्कालीन सरकार ने इसे नहीं माना तो उन्होंने सरकार से इस्तीफा दे दिया। आजादी की लड़ाई में हमारे लाखों करोड़ों स्वाधीनता सेनानियों ने समरस समावेशी भारत का सपना देखा था। उन सपनों को पूरा करने की शुरूआत बाबा साहब ने देश को संविधान देकर की थी। बाबा साहब ने भारत देश की बीमारी को पकड़ा और उसका सही उपचार किया ।बाबा के विचार आज भी हमारे लिए अनुकरणीय हैं और हमेशा रहेगा। अपने एक वक्तव्य में पी एम नरेंद्र मोदी ने कहा है कि अगर मार्टिन लूथर किंग की चर्चा दुनिया करती है तो उन्हें बाबा साहब को याद करने के लिए भी मजबूर कर देगा।
पूरी दुनिया बाबा साहब को जाने, समझे, उनके विचारों, आदर्शों से प्रेरणा लेकर उनके महान राष्ट्र के सपना को पूरा करने के लिए हमें अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी ।बाबा साहब ने जो कहा, वह जी करके दिखाया और जीवन पर्यन्त सामाजिक असमानता को दूर कर सामाजिक न्याय के लिए काम करते रहें।
विज्ञापन