टीम एबीएन, रांची। दिनांक 17 अगस्त को डी ए वी पब्लिक स्कूल गांधीनगर में साहित्यिक क्लब के बच्चों ने साहित्य की विविध विधाओं कविता, कहानी, पुस्तक समीक्षा, पत्र लेखन, डायरी लेखन, समाचार लेखन, ललित निबंध आदि विषयों पर अपनी साहित्यिक प्रतिभा की शानदार प्रस्तुति दी गई ।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय पुलिस सेवा के सेवानिवृत अधिकारी एवं प्रसिद्ध साहित्यकार प्रशांत करण उपस्थित थे। उन्होंने अपने वक्तव्य में साहित्यिक प्रतिभा के निखार के कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि केवल लिखने मात्र से लेखन की प्रतिभा नहीं निखरती अपितु एक लेखक को दूसरे की रचनाओं को निरंतर अध्ययन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शब्द साहित्य के शरीर होते हैं। शब्दों के उचित प्रयोग से साहित्य का शृंगार होता है और भावों की संप्रेषणीयता मार्मिक हो जाती है। शब्द दारिर्द्य से किसी भी लेखक के भाव निखर नहीं पाते। एक लेखक को नित्य नए शब्दों का प्रयोग करना चाहिए और विदेशी भाषा के प्रयोग से बचना भी चाहिए।
उन्होंने बच्चों की विभिन्न प्रस्तुतियों पर अपनी समीक्षाएं देकर उनका उत्साह बढ़ाया और त्रुटियों पर ध्यान दिलाकर उससे भविष्य में बचाने की सलाह दी। इसके पूर्व प्राचार्य श्री एस के सिन्हा ने अपने स्वागत भाषण के दौरान बच्चों को भारतीय संस्कृति और उसके समृद्ध साहित्य को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्राचीन और नवीन शिक्षा पद्धति की तुलना करते हुए प्राचीन शिक्षा प्रणाली की विशेषताओं से छात्रों को परिचित कराया।
उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे हैरी पॉटर जैसी किताबों को न पढ़कर भारत के प्राचीन कवियों को भी समय निकालकर पढ़ें। इससे उन्हें भारत की विशाल एवं समृद्ध साहित्य पर गर्व की अनुभूति होगी। इस अवसर पर विद्यालय के वरीय प्राध्यापक वैद्यनाथ मिश्र ने शब्द की त्रिविध शक्तियों अभिधा, लक्षणा और व्यंजना को सोदाहरण परिभाषित कर उनके प्रयोग की बारीकियों से छात्रों को परिचित कराया।
तीन घंटों तक चले इस कार्यक्रम का संचालन श्रीमती के नलिनी और श्रीमती सोमा घटक ने किया। इसके पूर्व दीप प्रज्ज्वलन, मंगलाचरण और स्वागत गीत से कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कविता मुखर्जी, लक्ष्मी कुमारी, ब्रजेशजी सिन्हा आदि की सराहनीय भूमिका रही। धन्यवाद ज्ञापन सुश्री सौम्य श्री ने किया।