झारखंड
महिलाएं सक्रिय हों, तो प्रदूषण से लड़ाई होगी आसान : उपायुक्त दिलीप कुमार टोप्पो
ABN Bureau
•
02 Dec, 2021
•
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लोहरदगा। वायू प्रदूषण और जलवायू संकट का सबसे बुरा असर बच्चों और महिलाओं पर पड़ता है। ऐसे में इससे लड़ने के लिए जिले की माताओं ने अब कमर कस लिया है। हाल ही में माताओं का एक दल, जिसका नाम वॉरियर मॉम का गठन किया गया है। वॉरियर मॉम का गठन देश के कई राज्यों में किया गया है। इसके तहत जिले की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी ये महिलाएं घर-घर जाकर लोगों को प्रदूषण और जलवायु संकट और उसके प्रभाव व बचाव के तौर-तरीकों से अवगत कराएंगी।
लोहरदगा में दो दिसम्बर को आयोजित समारोह में लोहरदगा उपायुक्त दिलीप कुमार टोप्पो की मौजूदगी में इसकी शुरूआत की गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि लोहरदगा उपायुक्त दिलीप कुमार टोप्पो ने कहा कि, झारखंड और लोहरदगा के लिए सही समय पर मातृ आंदोलन की शुरुआत हुई है। क्योंकि राज्य सरकार जल - जंगल और जमीन, जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण, स्वास्थ्य और आजीविका पर पड़ने वाले उसके प्रभाव को लेकर बेहद संवेदनशील है। यह महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहां कि 1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी में मारे गए लोगों की याद में प्रतिवर्ष 2 दिसंबर को राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया जाता है। स्वच्छ हवा के लिए पहाड़ों से लेकर जंगलों और नदियों, जैव विविधता को बचाना जरूरी है।
जानकारी के मुताबिक झारखंड के लिए हाल ही में जारी एनएफएचएस5 सर्वेक्षण में एक चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। राज्य में केवल 31.9% घरों में खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल होता है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भायवह है, वहां निराशाजनक रूप से 19.5% घरों में ही इसका इस्तेमाल हो पा रहा है। यह राष्ट्रीय स्तर से काफी कम है, जहां 58.6% कुल घरों और 43.2% ग्रामीण परिवारों के पास खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कार्यक्रम की आयोजकों में शामिल होप संस्था की मैनेजिंग ट्रस्टी और वॉरियर मॉम की सदस्य मनोरमा एक्का ने कहा कि, वॉरियर मॉम्स एक राष्ट्रीय स्तर की माताओं का समूह है, जहां माताएं अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक साथ आई हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में निर्णय लेनेवाली संस्थाएं चाहे वह सरकार हों या अन्य एजेंसियां, उन्होंने पर्याप्त ध्यान नहीं दिया है। अगले दशक में जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण से लड़ना महत्वपूर्ण होने जा रहा है, क्योंकि यह हमारे भविष्य की दशा और दिशा को तय करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि झारखंड में वॉरियर मॉम की इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए माताओं को आगे आने की जरूरत है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि हमारे पास घरों में बायोमास जलाने पर निर्भरता कम से कम हो। ताकि हम कई संक्रमणों और बीमारियों से खुद और अपने बच्चों को बचा सकें। यह पहले से ही चिंताजनक है कि, राज्य ने औसत भारतीय आबादी की तुलना में 10-12 साल पहले सीओपीडी की शुरुआत देखी है।
आयोजन के दौरान घरों में बायोमास जलने और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले उसके प्रभावों के बारे में जानकारी एक लिए एक चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। जहां एसएचजी के कई सदस्य इनडोर वायु प्रदूषण और जलवायु संकट के कारण बिगड़ते जल निकायों, मिट्टी और जंगलों और खनन, थर्मल पावर प्लांट और परिवहन जैसे विभिन्न स्रोतों से योगदान के बारे में अपनी जागरुकता बधाई और कुछ ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की।
इसके संचालन में झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) मदद करेगी। जेएसलएलपीएस लोहरदगा के डीपीएम प्रकाश रंजन ने कहा कि, घरेलू वायु प्रदूषण से होने वाला जोखिम जेएसएलपीएस के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि यह लैंगिक असमानता का मुद्दा है। क्योंकि महिलाओं को घरों में बायोमास जलाने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का अधिक खतरा होता है, जो उनकी आजीविका और उनकी आर्थिक स्वतंत्रता को प्रभावित करता है।
उन्होंने कहा कि, यह झारखंड के लिए जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण से संकट से लड़ने में महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका निभाने का एक अवसर है। जेएसएलपीएस वॉरियर मॉम के लोहरदगा के हर घर तक पहुंचने के संदेश का समर्थन करेगा। कार्यक्रम में पूरे जिले से 300 से अधिक स्वयं सहायता समूह की महिलाएं शामिल हुई। सबने एक बात पर सहमति जताई की महिलाओं के स्वास्थ्य को प्रदूषण से और राज्य के भविष्य को जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिणामों से बचाने के लिए अभी बहुत काम करने की आवश्यकता है। यह कार्यक्रम लोहरदगा और फिर राज्य के बाकी हिस्सों से शुरू किया जाएगा। इन एसएचजी के सदस्यों के सहयोग से जेएसएलपीएस इसे गांवों-कस्बों तक पहुंचाने का काम करेगा।
कौन हैं वॉरियर मॉम : ये वो माताएं हैं जो देशभर में अपने बच्चों के लिए स्वच्छ हवा की लड़ाई लड़ रही हैं। अपने बच्चों को शुद्ध वायु के लिए हम माताएं देशभर में निम्न पहल कर रही हैं: पूरे देश में स्वच्छ वायु के बारे में जनजागरण के तहत लोगों को वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के प्रमुख स्रोतों के बारे में जानकारी दे रही हैं। जनता को वायु प्रदूषण के खिलाफ खड़े होने के लिए प्रशिक्षित कर रही हैं। नीति निमार्ताओं से मिलकर वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कानून बनाने के लिए प्रेरित भी कर रही हैं।
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