टीम एबीएन, रांची। जब अधर्म बढ़ेगा तो महंगाई बढ़ेगी। मानवीय उत्पात, प्राकृतिक आपदाएं आयेंगी। जिस साल मीरा जी को देवर राणा जी ने जहर दिया था, उस साल मेवाड़ में अकाल पड़ गया था।
ब्रह्मचर्य, सत्य, तप, दान, संयम, शौच, अहिंसा, शांति, धैर्य, क्षमा, चोरी न करना, पवित्रता, इंद्रियों पर नियंत्रण , बुद्धि, ज्ञान, क्रोध न करना इनसे युक्त होने पर ही धर्म की वृद्धि होती है। आमजन सुखी समृद्ध और सम्पन्न रहते हैं।
जब धर्म पर चोट होगा तो, यही ग्लोबल वार्मिंग का रूप लेगा। ऐसी स्थिति में धरती भी ब्रह्मा और पति विष्णु के पास जाकर गुहार लगाती है। अपने और संसार की रक्षा के लिए, सामाजिक और राजनीतिक पाप के कारण अधर्म बढ़ता है।
रामवतार में एक राजा रावण तो कृष्णावतार में कंस, जरासंध और भोंमासुर पर संगीन आरोप था। भगवान के न्यायालय में आज भारत के चार हजार में सत्रह सौ सतर विधायक पर संगीन मुकदमा है और वही आरोपी कहते हैं मंहगाई बढ़ गयी।
जब आप अपराधियों को राजा बनायेंगे तो प्रकृति कुपित होगी ही। इसलिए मंहगाई का कारक हर आम इन्सान है, जो खेती बारी छोड़ दिया। जो सरकार खेती के लिए सुविधाएं नहीं दी या सुविधा छीन लिया। राजा और जनता दोनों महंगाई के लिए बराबर जिम्मेदार है।
अधर्म का बढ़ना भूमि देवी का भार बढ़ना है और जब यह भूभार-पाप बढ़ेगा तो भगवान ही नहीं नारी शक्ति भगवती भी नौ देवी और दस महाविद्याओं के रूप में अवतार लेकर दुष्टों का दमन करती है।
उक्त गुढ़ रहस्यों का उद्बोधन श्री मद्देवीभागवत कथा के चौथे दिन पंडित रामदेव पाण्डेय ने किया। उन्होंने कथा के दौरान राम-जानकी मन्दिर बरियातू में ये बातें कही। यह कथा बारह अगस्त तक चलेगी।