मनोरोग के इलाज में ली जायेगी मदद
टीम एबीएन, रांची। विश्व के कई देशों में मनोरोग के इलाज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) की मदद ली जा रही है। अपने देश में भी इसके जल्द शुरू होने की उम्मीद है। मनोरोग के इलाज में एआइ की मदद लेनेवाला केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (सीआइपी) देश का पहला संस्थान बनने जा रहा है।
संस्थान के परिसर में बुधवार को एआइ लैब और स्टीमुलेशन सेंटर का उद्घाटन होने जा रहा है। संस्थान के डॉक्टर करीब एक साल तक इस तकनीक का परीक्षण करेंगे। सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद मनोरोगियों के इलाज में इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया जा सकता है। विश्व में कई मन:चिकित्सा संस्थानों में मनोरोग के इलाज में एआइ की मदद ली जा रही है। इसमें चैट-जीपीटी का इस्तेमाल अधिक होता है।
अर्जेंटीना विश्वविद्यालय के छात्रों में अवसाद व चिंता के लक्षणों की जांच के लिए एआइ आधारित चैटबॉट्स का इस्तेमाल और इसके प्रभाव की जांच की गयी। अध्ययन के परिणामों से पता चला कि चैटबॉट्स के उपयोग को पारंपरिक चिकित्सा के पूरक के रूप माना जा सकता है।
हालांकि, प्रशिक्षित एआइ थेरेपिस्ट सहायक के साथ बातचीत में पता चला कि चैटजीपीटी सकारात्मक बातचीत करने, सक्रिय रूप से सुनने और स्पष्ट चिकित्सा सलाह देने में बहुत प्रभावी नहीं होगा। यह पाया गया कि चैटजीपीटी चिकित्सक के लिए बातचीत का सार निकालते समय महत्वपूर्ण विवरण में चूक कर सकता है।
अध्ययन से यह भी पता चलता है कि एक ही रोगी से कई वातार्लापों के बाद नयी इनसाइट (अंतर्दृष्टि) खोजने के लिए चैटजीपीटी का उपयोग किया जा सकता है। ऐसे में यह चिकित्सकों के लिए एक मूल्यवान उपकरण बन सकता है।