- गुरु पूर्णिमा को संकल्प दिवस के रूप में मनाने की जरूरत : आचार्य शरचचंद्र आर्य
- गुरु का पद जीवन निर्माता का है : शिव शंकर सिंह
- भारतीय संस्कृति में गुरु की महिमा अपरिमित : अभय
टीम एबीएन, लोहरदगा। लोहरदगा में पावन दिवस गुरु पूर्णिमा पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गुरुकुल शांति आश्रम लोहरदगा एवं सुंदरी देवी सरस्वती शिशु मंदिर प्रांगण में हवन कर गुरु के बताये मार्गदर्शन को संकल्प दिवस के रूप में मनाया गया। गुरुकुल शांति आश्रम लोहरदगा में आचार्य शरचचंद्र आर्य के मार्गदर्शन में आचार्य अर्जुनदेव आर्य के नेतृत्व में वैदिक विधि विधान के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन संपन्न हुआ।
इन्होंने कहा
शिवशंकर सिंह, जिला संरक्षक, पतंजलि
मौके पर राज्य कार्यकारिणी सदस्य सह जिला संरक्षक शिव शंकर सिंह ने कहा कि गुरु का पद जीवन निर्माता का है। गुरु एक शिल्पकार की भांति है, वह व्यक्तित्व को गढ़ता है, तराशता है।
आचार्य शरचचंद्र आर्य
आर्यवीर दल झारखंड प्रदेश के प्रांत प्रभारी आचार्य शरचचंद्र आर्य ने कहा कि एक मनुष्य को सही अर्थों में ज्ञानवान, प्रज्ञावान, शीलवान बनाने का अद्भुत और अद्वितीय पुरुषार्थ सिर्फ गुरु ही कर सकता है। उन्होंने आज सबों को संकल्प लेकर संकल्प दिवस के रूप में मनाने की जरूरत है।
अभय भारती
पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी अभय भारती ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु की महिमा को अपरिमित बताया गया है। महर्षि संदीपनी भगवान कृष्ण के गुरु थे। महर्षि वशिष्ठ भगवान श्री राम के गुरु विरजानंद महर्षि दयानंद के, चाणक्य चंद्रगुप्त के गुरु थे। इस परिप्रेक्ष्य में देखने से गुरु की महत्ता का अनुभव एवं गर्व होता है। सही अर्थों में कहा जाय तो बिना गुरु के ज्ञान संभव नहीं।
इनकी रही उपस्थिति
मौके पर पतंजलि योग समिति के सह जिला प्रभारी वासुदेव महतो, युवा प्रभारी अंकित अग्रवाल, योगेंद्र आर्य, रामसुभग राय, कोषाध्यक्ष दिनेश प्रजापति, सतीश जायसवाल, सौरव पिंक, कृष्णा राम, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक दीपक कुमार, प्राचार्य सुरेश चंद्र पांडेय, दिलीप कुमार समेत ब्रह्मचारी गण मौजूद रहे।