टीम एबीएन, लोहरदगा। लोकतंत्र के काले अध्याय आपातकाल के 48 साल पूरे होने पर नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (एनयूजे-आई) द्वारा रविवार को राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित वेबिनार में वरिष्ठ पत्रकारों ने आपातकाल के दौरान पत्रकारों पर हुए उत्पीड़न को याद किया। इस कालकंड में अनेक पत्रकारों की नौकरी गयी। अनेक जेल गये लेकिन वह झुके नहीं।
आपातकाल की चुनौती की आग में तप कर पत्रकारिता मजबूत हुई और लोकतंत्र में पत्रकारिता का महत्व सबके सामने आ गया।
आपातकाल के दौरान कुछ निर्भीक पत्रकारों द्वारा प्रेस की आजादी को बनाये रखने के लिए किये गये कार्यों की भी चर्चा की गयी।
वरिष्ठ संपादक और नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स के पूर्व अध्यक्ष अच्युतानंद मिश्र (लखनऊ) वरिष्ठ पत्रकार केएन गुप्ता (दिल्ली), रामभुवन सिंह कुशवाहा (भोपाल), प्रेम प्रकाश, हरियाणा के पूर्व मंत्री रामविलास शर्मा, दीपक मुखर्जी (झारखंड) बलदेव शर्मा (रांची), उमेश चतुर्वेदी (दिल्ली), उपज अध्यक्ष सर्वेश कुमार सिंह, डा फलकुमार, जितेंद्र अवस्थी (चंडीगढ़) तथा हिमाचल प्रदेश के जोगिद्रनगर स्थित पंजाब केसरी के वरिष्ठ पत्रकार रमेश बंटा सहित अनेक पत्रकारों ने आपातकाल के दौरान उनके उत्पीड़न की चर्चा की।
वेबिनार की अध्यक्षता एनयूजेआई अध्यक्ष अशोक मलिक ने की। धन्यवाद ज्ञापन यूनियन के महासचिव सुरेश शर्मा ने किया। आयोजन में कश्मीर से केरल और महाराष्ट्र से बंगाल तथा असम तक के पत्रकार शामिल हुए।