टीम एबीएन, रांची। केंद्र की सरकार अमीरों की चिंता तो करती है पर मजदूरों के मन की बात समझने में विफल है। श्रम कानूनों को खत्म कर गरीबों की जान की कीमत पर काम लिया जा रहा है। मजदूरों की उपेक्षा सरकारों के लिए घातक साबित होगा।
उपरोक्त बातें भाकपा माले के विधायक विनोद कुमार सिंह ने झारखंड के निर्माण मजदूरों के राज्य सम्मेलन को बतौर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कही। उन्होंने आगे कहा कि आज प्रवासी मजदूर हो या निर्माण मजदूर हर महीने मौत की खबरें सुर्खियों में है। मजदूरों की रोजगार सुरक्षा और सम्मान के मामले में केंद्र फिसडड्ी साबित हुईं है।
झारखंड निर्माण मजदूर यूनियन के सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन करते हुए बिहार मजदूर आंदोलन के नेता आर एन ठाकुर ने कहा कि बेरोजगारों की फौज को दंगों के टूल्स के रूप में इस्तेमाल करने की साजिश की जा रही है। मेहनतकशों की एकता को जाति-धर्म के नाम पर विभाजित करने नहीं दिया जायेगा।
संसद और विधानसभा बनाने वाले निर्माण मजदूरों के मन की पीड़ा समझने की कोशिश सरकार करे। सम्मेलन के प्रतिनिधि सत्र का समापन भाषण देते एक्टू के प्रदेश महासचिव शुभेंदु सेन ने कहा कि मजदूरों को अपनी ताकत का एहसास सरकार को भी कराना होगा। मजदूरों की एकता को राजनीतिक निर्णायक एकता के रूप में बढ़ाना होगा, तभी सरकार मजदूरों की आवाज सुनने के लिए बाध्य होगी।
9 अगस्त को देशव्यापी मजदूर महापड़ाव का आगाज होगा। आज विधायक क्लब धुर्वा रांची में अयोजित निर्माण मजदूर यूनियन के राज्य की अध्यक्षता पांच सदस्यीय अध्यक्ष मंडल ने किया। जिसमें भुवनेश्वर बेदिया, सुभाष मंडल, अमल घोष, भीम साहू, रोजलिन तिर्की ने किया।
सम्मेलन की शुरुआत मजदूर आंदोलन के शहीदों, धनबाद, बालासोर एवं काम के दौरान दुर्घटना में मृत मजदूरों को एक मिनट का मौन श्रद्धांजलि देकर हुई। सम्मेलन का झंडोतोलन वयोवृद्ध मजदूर नेता एनामुल हक ने किया। सम्मेलन के मसवीदा पर 24 प्रतिनिधियों ने अपना सुझाव और विचार रखे। इसका प्रस्तावित दस्तावेज यूनियन के महासचिव भुवनेश्वर केवट ने पेश किया।
राज्य सम्मेलन को विरादरना संगठन झामकिस के अध्यक्ष देवकी नंदन बेदिया, आंदोलनकारी पुष्कर महतो, सेख सहदूल, विजय गिरी, आर पी वर्मा, सुखदेव उरांव, काली मिंज आदि ने संबोधित किया।