टीम एबीएन, रांची। डीएवी प्रबंधन ने डीएवी पब्लिक स्कूल सीसीएल गांधीनगर के प्राचार्य एसके सिन्हा के कार्यकाल की अवधि का विस्तार किया है। इस उपलक्ष्य में विद्यालय में एक कार्यक्रम रखा गया। मौके पर डीएवी पब्लिक स्कूल्स एक के निदेशक जेपी सूर भी उपस्थित रहे। उन्होंने श्री सिन्हा को अवधि के विस्तार का पत्र प्रदान किया।
मौके पर उन्होंने नीट की परीक्षा में सफल छात्रों एवं उनके माता-पिता को सम्मानित भी किया। साथ ही डीएवी स्कूल्स प्रक्षेत्र डी के विभिन्न स्कूलों की शैक्षणिक प्रगति की पत्रिका का विमोचन किया। मौके पर डीएवी पब्लिक स्कूल्स प्रक्षेत्र ए के उप क्षेत्रीय पदाधिकारी ओपी मिश्रा, प्रक्षेत्र बी के एमके सिन्हा, डी की क्षेत्रीय उप पदाधिकारी डॉ उर्मिला सिंह, प्रक्षेत्र सी और जी के उप क्षेत्रीय पदाधिकारी अरुण कुमार, प्रक्षेत्र एच के उप शिक्षा पदाधिकारी पी हाजरा के अलावे डीएवी हेहल के प्राचार्य एसके मिश्रा, बरियातू के प्राचार्य बीके पांडेय, नीरजा सहाय की प्राचार्या किरण यादव, एसआर डीएवी के प्राचार्य एसके मिश्रा के साथ डीएवी स्कूलों के अनेक प्राचार्य तथा गांधीनगर के शिक्षक शामिल थे।
इसके पहले आगत अतिथियों का एनसीसी के विद्यार्थियों के साथ छात्र-छात्राओं ने झारखंड के गीतों के माध्यम से उनका पारंपरिक स्वागत किया। प्राचार्य एसके सिन्हा ने पुष्पगुच्छ देकर जेपी सूर का अभिनंदन किया। इसके साथ विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मोहक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में आये सभी क्षेत्रीय पदाधिकारियों ने पुष्प माला पहनाकर जेपी शूर का अभिनंदन किया।
अपने वक्तव्य में श्री सूर ने प्राचार्य श्री सिन्हा की डीएवी संस्था के प्रति सेवाभाव, श्रद्धा, उद्यमशीलता, कर्म के प्रति जुनून की सराहना की। इनकी कर्मठता और सेवा के कारण ही डीएवी संस्थाओं का सर्वश्रेष्ठ अवॉर्ड्स महात्मा हंसराज अवार्ड भी इनको दिया गया था। संस्था को ऐसे कर्मठ, ईमानदार और मेहनती व्यक्ति की आवश्यकता है। अपने वक्तव्य में उन्होंने यह भी कहा कि जीरो लेवल से काम करने वाला व्यक्ति ही उत्कृष्ट कार्यकर्ता होता है और जीवन में सफलता प्राप्त करता है।
अपना सर्वश्रेष्ठ एफर्ट लगाने वाला कभी जीवन में हताश या उदास नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक का कार्य केवल विद्यालय में आकर अध्यापन करना और वेतन लेना नहीं होता। एक शिक्षक को अपने क्रियाकलापों का उचित मूल्यांकन भी करना चाहिए। शिक्षकों को अपने कर्मों को सम्मान की दृष्टि से देखना चाहिए।
परिश्रम के बाद प्राप्त सफलता जीवन को उल्लास देती है। एक चिड़िया दिनभर तिनका-तिनका जोड़ कर एक घोंसला बनाती है, जब उसका घोंसला परिपूर्ण हो जाता है तो वह प्रसन्न होकर कर नाचती है। हमें चिड़िया से कर्म की प्रेरणा लेनी चाहिए।
मेहनत करने वाला नन्हें-नन्हें प्रयासों से एक बड़ा काम कर लेता है। एक नई दुनिया की रचना करने के लिए व्यक्ति को जुनून की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने यह भी कहा- दूसरों को खुशियों को हमें उत्सव के रूप में लेना चाहिए। डॉ उर्मिला सिंह ने आगत अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।