टीम एबीएन, रांची। सेवा भारती मातृ वाहिनी के तत्वावधान में रांची के बिरसा चौक स्थित सेवा निकेतन सभागार में आयोजित विचार गोष्ठी में राष्ट्रीय सेवा भारती की सचिव चंद्रिका चौहान ने राष्ट्र के विकास में मातृशक्ति का योगदान विषय पर अपने महत्वपूर्ण विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मातृशक्ति ही घर-परिवार में संस्कारों का बीजारोपण करती हैं।
सर्वप्रथम अपने परिवार में अच्छे संस्कार, अच्छे व्यवहार को जागृत करना है। आज की महिलाएं निसंदेह अत्यंत सशक्त है, हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी है और उनकी अभूतपूर्व सफलता है। परंतु यह भी सत्य है कि आज पश्चात संस्कृति का अनुकरण करने से महिलाओं का भटकाव हो रहा है। आज परिवारिक भाव कम होते जा रहा है।
देश प्रेम का बीज-वपन माताएं ही अपने बच्चों में कर सकती हैं। फिर यही बच्चे बड़े होकर देश का नाम उज्ज्वल करेंगे। संगोष्ठी की भूमिका रखते हुए राष्ट्रीय सेवा भारती की क्षेत्र महिला प्रमुख श्रीमती सोनी मेहता ने कहा कि सेवा भारती अपने विभिन्न सेवा आयामों के माध्यम से महिलाओं को सुशिक्षित, स्वावलंबी बनाने का कार्य कर रही है।
आधी आबादी की शक्ति किसी भी देश के पूर्ण विकास के लिए विराट शक्ति है। सर्वप्रथम देश की महिलाओं को अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक होना होगा जिससे वे देश को संभालने- संवारने में समर्थ हो सकें।
महिला संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डॉ संध्या रानी सिन्हा, प्राध्यापिका, रसायन शास्त्र विभाग बीआईटी,मेसरा ने राष्ट्र के विकास में महिलाओं का योगदान विषय पर अपने उद्बोधन में कहा कि महिलाओं के सामाजिक कार्यों एवं उपलब्धियों को समाज के बीच लाना होगा।
भारतीय महिलाएं संस्कृति और संस्कार में बंधी हुई होती है। देश को सशक्त करने के लिए महिलाओं को भी सशक्त होना अति आवश्यक है। महिला संगोष्ठी में मंजूषा देशमुख, शालिनी सचदेव, आरती सिंह, विमला कुमारी सहित शहर की समाजसेवी महिलाओं ने भी अपने महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में एकल गीत सुश्री रेणु कुमारी ने प्रस्तुत किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन सेवा भारती की शिक्षा आयाम प्रमुख कंचन प्रभा ने किया जबकि कार्यक्रम का सफल संचालन प्रांत महिला प्रमुख श्रीमती पूनम आनंद ने किया।