- जातपात नहीं है मुद्दा - नवाडीह के अधिकांश कुएं निजी भूमि पर
जातपात को लेकर प्रसारित की गई बातों को नवाडीह के ग्रामीणों से सिरे से खारिज किया - बोरिंग कराया गया, टैंकर से भी मिल रहा पानी
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के आदेश के बाद सिल्ली प्रखण्ड के बड़ाचांगडू पंचायत के अड़ाल नवाडीह गांव का रांची जिला प्रशासन ने दौरा किया। मुख्यमंत्री को जानकारी मिली थी कि यहां सभी कुएं ऊंची जातिवालों के हैं जहां दलित पानी भर नहीं सकते हैं। मुख्यमंत्री का आदेश मिलते ही उपर्युक्त विषय के संबंध में स्थल जांच किया किया गया।
ग्रामीणों ने छुआछूत जैसी बातों का किया खण्डन
उपरोक्त मामले की स्थलीय जांच के क्रम में गांव का भ्रमण किया गया एवं सभी पक्षों के साथ बैठक की गयी। सभी पक्षों की बातों को सुना गया। सभी तथ्यों को सुनने एवं पड़ताल के उपरांत छुआछूत अधविश्वास ऊंची जाति लोहरा (दलित) जैसे शब्द भ्रामक एवं उन्माद फैलाने वाले प्रतीत होते हैं।
यह घटना महतो एवं लोहरा जाति के बीच की है, जिसमें ऊची जाति या दलित जैसी कोई भावना नहीं हैं। जांचोपरांत पता चला कि दोनों समूह झारखण्ड राज्य की जातियों की सूची पिछड़ी जाति ( BC Annexure-1) में दर्ज है। ग्रामीणों ने भी छुआछूत जैसी बातों का खण्डन किया एवं उनके द्वारा बताया गया कि समाज के लोग सभी सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में एक साथ सहभागी होते हैं।
समस्या पानी की किल्लत को लेकर हुई, पेयजल की व्यवस्था के कार्य शुरू
स्थलीय जांच में पता चला कि मूलतः यह समस्या पानी की किल्लत को लेकर उठी। अधिकांश कुएं निजी जमीन पर बने है, जिसमें कुछ लोगों के द्वारा अन्य लोगों को पानी भरने नहीं दिया जाता है क्योंकि गर्मी के कारण कुएं का जलस्तर कम हो गया है। भ्रमण के दौरान सरकारी कुएं चिह्नित हुए, जो साफ सफाई के अभाव में या तो सूख गये हैं या पानी गंदा हो गया है।
जल संबंधी समस्या का निरीक्षण सहायक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता प्रशाखा, अनगड़ा एवं कनीय अभियंता पेयजल एवं स्वच्छता प्रशाखा, सिल्ली ने किया। सर्वेक्षण के उपरांत खराब पड़े चापाकल की मरम्मत एवं पुराने जलमीनार की मरम्मति तत्काल करा दी गयी।
सम्पूर्ण गांव को एसवीएस से जलापूर्ति हेतु अच्छादित करने के लिए स्वीकृत योजना के तहत कार्य प्रारंभ करा दिया गया है एवं विभाग ने बोरिंग भी कराया है। वर्त्तमान में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में टैंकर से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही निजी कुएं से भी पानी लेने पर सहमति बनी है।