- झारखंड पंचायती राज निदेशक ने की बांस कारीगरों की प्रसंशा
टीम एबीएन, गुमला/ रांची। गुमला जिले के पारंपरिक कलाओं को बढ़ावा देने एवं शिल्पकारों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से उपायुक्त सुशांत गौरव की पहल से जिले के मुख्यधारा से बाहर रहे लघु उद्यमी बांस कारीगरों को पहचान दिलाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा लगातार काम कर रहा है, जहां एक तरफ बांस कारीगरों के लिए बांस कला केंद्र का निर्माण किया गया है।
वहीं दूसरी ओर बैंबू टूल किट का भी वितरण करने के साथ-साथ उनके कौशल विकास के लिए भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पारंपरिक लघु कौशल उद्योग को बढ़ावा देने हेतु भारत सरकार के आरजीएसए योजना के तहत झारखंड सरकार की पंचायती राज निदेशक निशा उरांव ने गुमला के सिसई प्रखंड स्थित बांस कला केंद्र का निरीक्षण किया।
इस दौरान उन्होंने बांस शिल्पकारों से मुलाकात की एवं जिला प्रशासन द्वारा मिलने वाली सुविधाओं की कहानी बांस शिल्पकारों की जुबानी सुनी। इस दौरान बांस शिल्पकारों के चेहरे पर खुशी दिखी। पंचायत राज निदेशक ने कहा कि गुमला राज्य का पहला जिला है जो बांस शिल्पकारों के लिए जमीनी स्तर पर इस प्रकार से कार्य किये जा रहे हैं।
झारखंड पंचायती राज निदेशक निशा उरांव ने कहा कि भारत सरकार से प्राप्त निर्देश के आलोक में झारखंड सरकार अलग-अलग जिलों के पारंपरिक शिल्प कला को चिह्नित करते हुए उनके उत्थान के लिए योजनाएं तैयार की जायेगी। इसी संबंध में गुमला दौरे के क्रम में सिसई में बांस शिल्पकारों के लिए बनाये गये बांस कला केंद्र का निरीक्षण एवं शिल्पकारों से मिल कर यहां की स्थिति का जायजा लिया।
निदेशक ने कहा कि शिल्पकारों के उत्थान के लिए गुमला उपायुक्त की पहल काफी सराहनीय है। जिले में लघु उद्यमियों के लिए अपेक्षा से अधिक कार्य किया जा रहा है, जो बाकी जिलों से गुमला जिले को अलग स्थान देता है।