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रांची विवि में जलवायु परिवर्तन पर आयेजित दो दिवसीय संगोष्ठी का समापन

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रांची विवि में जलवायु परिवर्तन पर आयेजित दो दिवसीय संगोष्ठी का समापन
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टीम एबीएन, रांची। 26 मई 2023 को आर्यभट्ट सभागार में जलवायु परिवर्तन चुनौतियां एवं अवसर  विषय पर एक बहुत ही सफल संगोष्ठि का समापन हो गया। यह संगोष्ठि  जूलॉजी डिपार्टमेंट आरयू तथा आइक्यूएसी के द्वारा आर्यभट्ट सभागार में आयोजित किया गया। संगोष्ठी में देश के कई शहरों से प्राध्यापकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। कुलपति आरयू प्रो.डॉ. अजीत कुमार सिन्हा इस संगोष्ठी में आये सभी वक्ताओं को स्मृति चिन्ह, शॉल  तथा पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। 

कुलपति ने कहा कि संगोष्ठी के दूसरे दिन के कार्यक्रम में डीएसपीएमयू के कुलपति डॉ. तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि हमें वर्तमान जीवन शैली को बदलना होगा और प्लास्टिक फ्री जीवनशैली को विकसित करना होगा। वर्तमान में हमारा खान पान भी हमारे स्वास्थ्य सहित प्रकृति को नुकसान पहुंचा रहा है। हम वैसे भोजन का सेवन हमें अपने पारंपरिक खान-पान की शैली पर विशेष ध्यान देना चाहिये। उन्होंने कहा कि प्लासिटक फ्री परिवेश बनाने के लिये प्रत्येक व्यक्ति को एक लिस्ट बना कर अपने कार्यस्थल और परिसर में प्लास्टिक के उपयोग को कम करने का प्रयास करना चाहिये। 

कुलपति आरयू प्रो. डॉ. अजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि अब रांची विश्वविद्यालय के प्रत्येक कार्यक्रम में हम और हमारे छात्र एक पौधा अवश्य लगायेंगे । हाल में ही झारखंड सरकार से यह पत्र मिला है कि हमें एक जून से सात जून तक एक स्प्ताह का पर्यावरण सप्ताह मनाना है, पर हम इसे एक पखवाड़े तक आयोजित करने जा रहे हैं और यह पर्यावरण पखवाड़ा इस संगोष्ठी के 25 जून  से ही प्रारंभ हो चुका है।

उन्होंने कहा कि इस प्रयास में मैं किसी लीडर की तरह नहीं बल्कि सबों के साथ एक सहयोगी की तरह उपलब्ध हूं। संगोष्ठी में ओरल प्रेजेंटेशन के लिये छात्रों एवं प्राध्यापकों को कुलपति एवं अन्य द्वारा पुरस्कृत किया गया जिसमें  जमशेदपुर की पीजी की छात्रा पूजा कुमारी  को प्रथम पुरस्कार, आरएलएसवाई कॉलेज के जूलॉजी की प्राध्यापक माधुरी कुमारी को द्वितीय पुरस्कार, मनीष कुमार साहू एंथ्रोपोलॉजी विभाग आरयू के प्राध्यापक को तृतीय पुरस्कार  तथा पोस्टर प्रेजेंटेशनके लिये साइकॉलॉजी विभाग जेएनकॉलेज की प्राघ्यापक इंदू सोलंकी को पुरस्कृत किया गया। 

संगोष्ठी में झारखंड ओपन युनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. टीएन साहू ने कहा कि हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बना कर जीने की कला आनी चाहिये। यह सारी चीजें हम आदिवासी समाज से सीख सकते हैं। आदिवासी समाज वृक्षों की पूजा करता है, जल्दी किसी वृक्ष को काटता नहीं, उसके सारे पर्व त्यौहार प्रकृति के साथ जुड़े होते हैं। वास्तव में आदिवासी प्रकृति का रक्षक और सेवक है। 

संगोष्ठी में बीएचयू बनारस से आये प्रो. एक.के. त्रिगुण, उमाशंकर सिंह, ने भी जलवायु परिवर्तन विषय पर अपने शोधपरक जानकारियों से सभागार में सभी लोगों को कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।    
आरयू के पूर्व वरिष्ठ प्राध्यापक, मारवाड़ी कॉलेज के प्राचार्य रहे एवं शिक्षाविद् डॉ. तुलस्यान ने रांची विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय संगोष्ठि की प्रसंशा करते हुये कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि रांची विश्वविद्यालय सहित देश भर के शिक्षाविद् और जानकार जलवायु परिवर्तन जैसे विषय पर मंथन और निदान के लिये एकत्र हुये। उन्होंने सबों का आभार जताया। 
कार्यक्रम का संचालन डिप्टी डायरेक्टर वोकेशनल डॉ. स्मृति सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो बीके सिन्हा एवं सोनी कुमारी तिवारी ने किया। प्रो बीके सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर कुलसचिव आरयू डॉ. मुकुंद चंद्र मेहता, एफओ डॉ. कुमार आदित्यनाथ शाहदेव, डॉ.फिरोज अहमद, एफए डॉ देवाशीष गोस्वामी, सीसीडीसी डॉ. पी.के.झा,  परीक्षा नियंत्रक डॉ. आशीष कुमार झा, एफ.ओ. डॉ. कुमार आदित्यनाथ शाहदेव, डीएसडब्ल्यू डॉ. सुदेश साहु, डॉ. राजकुमार शर्मा , डॉ. जीएस.झा समेत, साईंस डीन डॉ. कुनुल कुंदिर समेत कई विभागों के हेड, डीन एवं प्राध्यापक एवं सैकड़ो छात्र उपस्थित थे।

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