- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वितीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग में बुधवार को भागवत ने संघ प्रार्थना की विस्तृत व्याख्या की
- प्रार्थना की सरलता और इसमें समाहित भाव के बारे में बताया
- सुबह और सांय के संघ स्थान गतिविधियों में भाग लिया
- उत्तर बिहार और झारखंड प्रांत के शिक्षार्थियों से परिचय प्राप्त किया
- गण शिक्षकों के साथ संघ प्रमुख ने जलपान किया
टीम एबीएन, लोहरदगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रार्थना नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे हर भारतीय के व्यक्तित्व में राष्ट्रप्रेम भक्ति और अटूट आस्था भर देता है। यह प्रार्थना भारत की संस्कृति, संस्कार, अध्यात्मिक पहलुओं के प्रति हमें सजग बनाता है। राष्ट्र कैसे परम वैभव को प्राप्त करें,हमारी प्रार्थना यह सीख भी देता है। उक्त बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहीं।
वह लोहरदगा में चल रहे 20 दिवसीय द्वितीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग विशेष के शिक्षार्थियों को बुधवार को संबोधित कर रहे थे। अपने चार दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग सत्र के दूसरे दिन बुधवार को आरएसएस के ग्लोबल हेड मोहन भागवत ने संघ प्रार्थना की व्याख्या और उसकी सरलता को लेकर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संघ प्रार्थना संस्कृत में संस्कृत हमारी संस्कृति का प्रतीक है।
नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रार्थना है। सम्पूर्ण प्रार्थना संस्कृत में है। इसकी अन्तिम पंक्ति भारत माता की जय ही हिन्दी में है। इसे सर्वप्रथम 23 अप्रैल 1940 में पुणे के संघ शिक्षा वर्ग में गाया गया था। तब से यह प्रार्थना संघ की शाखा या अन्य कार्यक्रमों में इस प्रार्थना को अनिवार्यतः गाया जाता है। ध्वज के सम्मुख नमन किया जाता है।
प्रथम और द्वितीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग 20-20 दिन के होता हैं।द्वितीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग का आयोजन सामान्यत: क्षेत्र करता है। तृतीय संघ शिक्षा वर्ग हर साल नागपुर में ही होता है। संघ प्रमुख मोहन भागवत में बुधवार को संघ संगठन के दृष्टिकोण से उत्तर बिहार और झारखंड के संघ शिक्षार्थियों से परिचय प्राप्त किया। संघ शिक्षा वर्ग द्वितीय वर्ष विशेष क्षेत्रीय संगठन द्वारा आयोजित होता है।
संघ प्रमुख बुधवार को सुबह और शाम को शाखा की गतिविधियों में भाग लिए। वह 12 गण शिक्षकों के साथ जलपान जलपान किये। बुधवार के को दो प्रांतों के 55 शिक्षार्थियों से परिचय प्राप्त किया। संघ की गतिविधियों की जानकारी ली। सांय को संघ स्थान के बाद भी परिचय का सत्र चलता रहा।
19 मई को मनोहर लाल अग्रवाल सरस्वती विद्या मंदिर प्लस टू स्कूल परिसर में संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया जायेगा। लोहरदगा में संघ शिक्षा वर्ग प्रथम और द्वितीय वर्ष का प्रशिक्षण अलग-अलग स्थान पर चल रहा है। इसमें 800 से अधिक स्वयंसेवक भाग ले रहे हैं। संघ के जिला, विभाग, प्रांतीय और क्षेत्रीय और राष्ट्रीय अधिकारी भी बड़ी संख्या में उपस्थित हैं।