टीम एबीएन, रांची। एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल, पुंदाग में दिनांक 11.5.23 - 12.5.23 तक दो दिवसीय शिल्पकला प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ, जिसके मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति श्रीसंजय प्रसाद तथा विशेष अतिथि के रूप में आईजी (मानव संसाधन) श्री अखिलेश झा ने प्राचार्य तथा अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ मिलकर दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
विद्यालय की संगीत मंडली ने स्वागत गान प्रस्तुत किया। प्राचार्य श्री संजीत कुमार मिश्रा ने सभी अतिथियों का औपचारिक स्वागत करते हुए कहा कि यह हमारे लिए परम सौभाग्य का विषय है कि आज विद्यालय प्रांगण में रांची के अनेक प्रतिष्ठित व्यक्ति उपस्थित होकर हमारे विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन कर रहे हैं। इससे विद्यार्थियों में नई ऊर्जा का संचार होगा तथा अन्य विद्यार्थियों को भी कला तथा शिल्प के क्षेत्र में काम करने की प्रेरणा मिलेगी।
तत्पश्चात छात्राओं के द्वारा स्वागत नृत्य की मोहक प्रस्तुति दी गयीं। इस अवसर पर शिक्षा, कला एवं साहित्य के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करनेवाले कक्षा द्वादश के विद्यार्थियों; सृजन स्वप्निल, शुभांगी तथा चेतनाश्री को सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति श्री संजय प्रसाद ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के साथ-साथ विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। विद्यार्थी भविष्य में इन्हें भी जीवनयापन का जरिया बना सकते हैं। शिल्पकला विद्यार्थियों को आनंद, संतुष्टि आदि के साथ-साथ प्रसिद्धि तथा समृद्धि भी दिला सकती हैं।
विशेष अतिथि श्री अखिलेश कुमार झा ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिल्प एवं कला का महत्त्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। इससे विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का विकास होता है। साथ ही विद्यार्थियों के चहुमुखी विकास में भी मदद मिलती है।कौशल विकास करके विद्यार्थी स्वयं को समाज के लिए उपयोगी साबित कर सकते हैं। तदुपरांत शिल्प तथा कला प्रदर्शनी का विधिवत उद्घाटन किया गया।
सभा में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों को उनके सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पौधा भेंट करने के साथ ही शॉल एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। मौके पर जवाहर विद्या मंदिर के प्राचार्य श्री समरजीत जाना, टोरियन वर्ल्ड स्कूल के प्राचार्य श्री सुभाष कुमार, फिरायालाल पब्लिक स्कूल के प्राचार्य श्री नीरज सिन्हा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। शांति पाठ के साथ सभा समाप्त हुई।