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पलामू किले पर कभी था लालू राज, अब भाजपा का कब्जा

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पलामू किले पर कभी था लालू राज, अब भाजपा का कब्जा
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टीम एबीएन, पलामू। पलामू जिला का इतिहास 127 साल पुराना है। 1 जनवरी 1892 को पलामू को जिला घोषित किया गया था। इस जिले का मुख्यालय मेदनीनगर है। इसे डाल्टनगंज के नाम से भी जाना जाता है। इस क्षेत्र पर कभी खरवार, उरांव और चेरो ने पलामू पर शासन किया। मुगलकाल में इसे पलून या पालून भी कहा जाता था। जंगलों-पहाड़ों से घिरा पलामू क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक-पौराणिक स्थलों से परिपूर्ण है। कहते हैं पांडवों ने अपने अज्ञातवर्ष का कुछ समय यहां पर बिता था। दूसरे नंबर के पांड्व भीम यहीं पर भोजन बनाया करते थे। इसके चलते भीम चूल्हा आज भी यहां है। लामू के प्रमुख जनजातियों में खेरवार, चेरो, उरांव, बिरजिया और बिरहोर शामिल हैं। खेरवार अपने-आपको सूर्यवंशी क्षत्रिय बताते हैं और यूपी में स्थित अयोध्या को काफी पूज्यनीय मानते हैं। जनजातीय विश्वास और रीति-रिवाज के चलते लोग जंगलों को पवित्र मानते हैं। पलामू लोकसभा सीट, झारखंड के दो जिलों पलामू और गढ़वा में फैली हुई है। इस लोकसभा सीट के तहत 7 विधानसभा सीटें (पलामू, डाल्टनगंज, गरहवा, भगवंतपुर, बिस्वरामपुर, छतरपुर और हुसैनाबाद) आती हैं। इनमें छतरपुर अनुसूचित जाती के लिए आरक्षित है।
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