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लोहरदगा : गिरिवर उवि की ग्रामीण शाखा भक्शो में मलेरिया जागरूकता कार्यक्रम

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लोहरदगा : गिरिवर उवि की ग्रामीण शाखा भक्शो में मलेरिया जागरूकता कार्यक्रम
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टीम एबीएन, लोहरदगा। विज्ञान- प्रसार (भारत सरकार) से संबद्ध संस्था भास्कर एस्ट्रो एशोसिएशन लोहरदगा द्वारा गिरिवर शिशु सदन उच्च विद्यालय की ग्रामीण शाखा भक्शो में मलेरिया जागरुकता विषयक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ विषय प्रवेश एवं अतिथि परिचय से हुओ

एशोसिएशन के सचिव वैद्यनाथ मिश्र ने मलेरिया ज्वर के लक्षण के लक्षण बतलाते हुए कहा गया कि मलेरिया रोग की उत्पत्ति विशेष प्रकार के मच्छर के काटने से होता है जिससे एनोफिल मच्छर कहा जाता है, यह मच्छर गंदगी में उत्पन्न होते हैं। इसलिए अपने घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिऐ और  झाडी  या क्षअन्य गंदगी चीजों को हमेशा साफ करते रहना चाहिए। 

गंदगी में ही यह मच्छर अंडा देती हैं और तेजी से उनकी संख्या बढ़ती है जिससे यह रोग फैलता मुख्य प्रवक्ता के रुप में उपस्थित चंदन भारती जी द्वारा विशद रूप से मलेरिया के संबंध में प्रकाश डाला गयो उन्होंने बतलाया कि मलेरिया एक विशेष प्रकार के एनोफिल मच्छर कहते हैं। 

मलेरिया मच्छर के भी नर और मादा दो प्रकार के होते हैं। मादा मच्छर द्वारा ही मनुष्य को काटा जाता है और वह  खून लेते समय मलेरिया के कीटाणु प्रविष्ट कर देते हैं। यह गंदगी में और आसपास जमा हुए पानी में अंडा देती है जिसे कारण से रोग का  फैलाव होता है। 

उन्होंने मलेरिया होने पर डॉक्टर से दिखाकर रक्त परीक्षण कराकर दवा लेने  की बात भी कहीे रक्त परीक्षण से संबंधित आरबीसी, डब्ल्यूबीसी इत्यादि के संबंध में भी उन्होंने बतलाया  बतलायो मलेरिया रोग की मुख्य दवा का कुनैन होता है। यज्ञ अन्य एंटीबायोटिक दवाइयों द्वारा ठीक नहीं किया जा सकता। 

उन्होंने यह भी बताया कि चिरायता के पत्ता को उबालकर पीने से भी मलेरिया रोग के कीटाणुओं का नाश होता है। मलेरिया से ही मस्तिष्क रोग मेनिनजाइटिस होता है, जिसमें अधिकतर लोगों की मृत्यु करंज का तेल लगाने से भी मच्छर नहीं काटते हैं। 

मच्छरदानी के अंदर में  सोन ने से मच्छर के प्रकोप से बचा जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के शिक्षक नितेश मोहाली द्वारा आभार और धन्यवाद ज्ञापन किया गया। इस कार्यक्रम में  विद्यालय के छात्र छात्राएं और शिक्षक उपस्थित थे।

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