- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन के राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने दिया निर्देश
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में वनों के संरक्षण के लिए वन में गिरे हुए सूखे पत्तों की समस्या का हल निकालना आवश्यक है। इन पत्तों के कारण वनों में अक्सर आग लगने की घटनाएं होती हैं। इन पत्तों से जैविक खाद, वैकल्पिक जलावन व पत्तल आदि के रूप में उपयोगी बनाना होगा। उन्होंने कहा कि इसमें ग्रामीणों विशेषकर आदिवासी समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित की जाये। उक्त बातें केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कही।
केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में चौबे ने कहा कि पलामू व्याघ्र अभ्यारण्य में बाघों की संख्या बहुत कम है, इस पर सरकार को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नगर वन योजना के तहत भारत सरकार ने 6 प्रस्तावों का अनुमोदन किया है। इस योजना से रांची, धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो, हजारीबाग और गिरिडीह लाभान्वित हुए हैं। नगर वन योजना को आजादी के अमृत महोत्सव पर स्वतंत्रता सेनानियों, शहीदों, ओलंपिक पदक विजेताओं के नाम पर नामकरण किया जायेगा।
स्कूल नर्सरी योजना में अच्छे स्कूलों का चयन और जागरुकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए सघन कार्यक्रमों पर जोर दिया जाना चाहिए।
बैठक में राज्य सरकार के अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एनके सिंह, संजीव कुमार, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव वाईके दास, एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालय के उप महानिदेशक संतोष तिवारी, प्रभागीय वन प्राधिकारी श्रीकांत वर्मा एवं खाद्य आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। मानव-हाथी संघर्ष में मृत्यु का अनुपात सर्वाधिक 120 है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मानव-हाथी संघर्ष से होने वाली मौत का अनुपात जहां देश में 15 का है, वहीं झारखंड यह अनुपात सर्वाधिक 120 है। इस पर रोक के लिए राज्य सरकार को केंद्र की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का उचित अनुपालन करना चाहिए। साथ ही मृत्यु होने पर मुआवजे की वर्तमान राशि को 4 लाख से अधिक करने की जरूरत है।