टीम एबीएन, रांची। बच्चों में नैतिकता, सदाचार, दया, करुणा, प्रेम, संवेदना आदि मानवीय गुणों के विकास के लिए डीएवी पब्लिक स्कूल सीसीएल गांधीनगर में दो दिवसीय वैदिक चेतना शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में कक्षा सातवीं और आठवीं के छात्रों ने भाग लिया। प्रात:कालीन हवन के पश्चात छात्रों को संबोधित करते हुए आर्यसमाज के विद्वान श्री धर्म वीर आर्य और श्री विमलेंद्र शास्त्री ने बच्चों को संबोधित किया।
संबोधन में धर्मवीर आर्य ने बच्चों से कहा कि आज के परिप्रेक्ष्य में संस्कार की महती आवश्यकता है। संस्कार हीन शिक्षा चप्पू विहीन नौका की तरह है जो लक्ष्य नहीं दे सकती। माता-पिता गुरुजनों के प्रति सम्मान की भावना से संस्कार परिलक्षित होता है । गुरुजनों के प्रति श्रद्धा रखने से बच्चों में बौद्धिक क्षमता ही नहीं मानसिक क्षमता का भी विकास होता है। उन्होंने कहा कि आज के परिदृश्य में बच्चे अध्यात्म से दूर हो रहे हैं जो देश के सुखद भविष्य के लिए खतरनाक है।
संस्कारविहीन व्यक्ति जीवन में सफल नहीं हो सकता है। ईश्वर के प्रति आस्था रखते हुए व्यक्ति को कर्म करने के लिए निरत होना चाहिए। प्राचार्य श्री एसके सिन्हा ने कहा कि शिक्षा में अगर संस्कार हो, चरित्र हो तो सोने पे सुहागा है। उन्होंने बच्चों में संस्कार विकसित करने के लिए विद्यालय के प्रयासों की सराहना की। इसके पहले बच्चों को प्राणायाम की बारीकियों से परिचय कराया गया तथा उनसे विभिन्न योग कराये गये। विद्यालय के वरीय शिक्षक डॉ वैद्यनाथ मिश्र, श्री पूर्णचंद्र आर्य आदि शिक्षक शिक्षिकाओं की भूमिका रही।