टीम एबीएन, कोडरमा। मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ और किसानों के उपज का डेढ़ गुणा दाम के लिए एमएसपी की गारंटी व कृषि ऋण माफ करने, गरीबों को जमीन का पट्टा देने, सभी मजदूरों को न्यूनतम 26 हजार वेतन व 10 हजार पेंशन देने, अंधाधुंध निजीकरण पर रोक लगाने, स्थायी रोजगार की गारंटी करने, केरल मॉडल के तहत पीडीएस दुकानों से रोजमर्रे के सभी 30-34 सामान देने, मजदूर विरोधी चार लेबर कोड रद्द करने, मनरेगा में 200 दिन का काम और 600 रूपये मजदूरी देने इत्यादि मांगों पर 5 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाले किसान मजदूर संघर्ष रैली में कोडरमा जिला सहित झारखंड से दस हजार किसान मजदूर शामिल होंगे। यह जानकारी मजदूर नेता और सीटू के राज्य सचिव संजय पासवान ने मीडिया को दी।
उन्होंने कहा कि किसान, मजदूर, खेत मजदूर और मेहनतकश जनता पर मोदी सरकार लगातार हमला कर रही है। आज देश कमरतोड़ महंगाई व बेरोजगारी के गंभीर संकट से गुजर रहा है। भाजपानीत केन्द्र सरकार के द्वारा जनविरोधी नीतियों को थोप कर देश की जनता पर लगातार हमला कर रही है। नेशनल मोनेटाईजेशन पाइप लाइन के तहत देश की तमाम सार्वजनिक क्षेत्रों बैंक, बीमा, रेल, कोयला, स्टील आदि को निजीकरण कर पूंजीपतियों के हाथों में सौंप रही है। सरकारी नौकरियां समाप्त कर नौजवानों के भविष्य को बर्बाद किया जा रहा है। मजदूरों को गुलाम बनाने के लिए 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार लेबर कोड में बदल दिया है। स्वास्थ्य, शिक्षा, मनरेगा सहित सभी जनकल्याणकारी योजनाओं के आवंटन में लगातार कटौती किया जा रहा है।
किसानों को फसलों का दाम नहीं मिल रहा है और वे आत्महत्या करने को मजबूर हैं। जनवितरण प्रणाली को ध्वस्त किया जा रहा है। जिसके तहत सरकारी राशन की दुकानों से मिलने वाला अनाज चावल, गेहूं आदि जो सस्ते दामों में मिलता था, उसे बंद कर दिया गया है। वन नेशन वन राशन कार्ड के नाम पर पीडीएस सिस्टम को समाप्त करने की साजिश हो रही है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पूंजीपतियों का एक लाख कर्जा माफ कर दिया, लेकिन देश के अन्नदाता किसानों का कर्ज़ा एक रूपये भी माफ नहीं किया। हिन्दु मुस्लिम के नाम पर इंसान को इंसान से लड़ाया जा रहा है और असली मुद्दे से ध्यान भटकाया जा रहा है। विपक्षी नेताओं पर हमला हो रहा है, उन्हें जेल में डाला जा रहा है। उन्हें संसद में जाने से रोका जा रहा है। देश में अघोषित इमरजेंसी लागू हो गया है। 5 अप्रैल को देश के कोने-कोने से लाखों किसान मजदूर दिल्ली रैली में भाग लेंगे और मोदी और अडानी की गठजोड़ वाली मोदानी सरकार की कॉरपोरेट परस्त नीतियों के खिलाफ दिल्ली रैली में संकल्प लेंगे कि यदि यह सरकार नीतियां नहीं बदलेगी तो हम किसान मजदूर इस सरकार को बदल देंगे।
इस ऐतिहासिक रैली में पांच लाख से ज्यादा किसान मजदूर, खेत मजदूर, छात्र नौजवान और महिलाएं और आम आवाम हिस्सा लेंगे।