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सड़क से सदन तक हजारीबाग की रामनवमी की गूंज, आमरण अनशन पर लोग

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सड़क से सदन तक हजारीबाग की रामनवमी की गूंज, आमरण अनशन पर लोग
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टीम एबीएन, हजारीबाग। हजारीबाग में रामनवमी में डीजे पर पाबंदी को लेकर अनशन जारी है। अनशन पर बैठे हिंदू प्रचारक अजय सिंह की तबीयत अचानक खराब हो गयी। जिसके बाद सदर विधायक मनीष जायसवाल धरना स्थल पर पहुंचे। 

वहीं, सूचना मिलने पर मेडिकल की टीम भी मौके पर पहुंची। हजारीबाग की रामनवमी का इतिहास आजादी से पहले का है और वर्तमान सियासत के चंगुल में फंसा नजर आता है। प्रशासन की पाबंदी ने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है तो वहीं अब सियासत की चिंगारी भी सुलग उठी है। 

अपनी मांगों पर अड़े प्रदर्शनकारी : हजारीबाग में रामनवमी का नजारा देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। क्योंकि यहां रामभक्तों के जुलूस का नजारा ही अलग होता है। नजारे की भव्यता को हर कोई अपनी आंखों में समेटना चाहता है, लेकिन इस बार प्रशासन की पाबंदियों ने रामनवमी से पहले सियासी संग्राम छेड़ दिया है। दरअसल प्रशासन ने धारा 144 समेत डीजे न बजाने का आदेश जारी किया, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश का माहौल है। 

प्रशासन के आदेश के खिलाफ बीते 3 दिनों से स्थायीन आमरण अनशन पर बैठे हैं। अनशन पर बैठे लोगों से वार्ता करने 3 दिनों के बाद जिला प्रशासन की टीम धरनास्थल पर पहुंची और धरना खत्म करने की कोशिश भी की, लेकिन धरने पर बैठे लोग अपनी मांगों पर अडिग रहे। लिहाजा वार्ता विफल हो गयी। प्रशासन के खिलाफ आमरण अनशन करने वालों की मांग है कि प्रशासन धारा-144 को हटाये। डीजे पर पाबंदी हटाई जाए और मंगला जुलूस मामले में झूठे केस वापस लें। 

प्रशासन के फैसले पर सियासी घमासान : अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे लोगों से मिलने सांसद जयंत सिन्हा भी पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों का हाल जाना और उनकी मांगों को साथ ही हेमंत सरकार को जमकर आड़े हाथ लेते हुए कहा कि हजारीबाग में रामनवमी जैसे मनाई जाती थी वैसे ही मनायी जायेगी। 

हजारीबाग में रामनवमी को लेकर शुरू घमासान की गूंज सड़क से सदन तक सुनाई दी। जहां शनिवार को सदन में भी मामले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर दिखे। हजारीबाग के रामनवमी को लेकर प्रशासन के फैसले के खिलाफ सत्ता पक्ष के कुछ विधायक भी है। बावजूद भाजपा सरकार को घेरने में लगी है। अब स्थानीय लोगों की मांग पर प्रशासन सुनवाई करती है या नहीं इसका तो पता नहीं लेकिन मामले पर सियासी रोटियां सेंकने में कोई दल पीछे नहीं है।

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