- झारखंड के रामगढ़, हजारीबाग, पलामू, गढ़वा 291 किमी के लिए माल गाड़ियों के लिए होगा वरदान साबित
टीम एबीएन, कोडरमा। किसी भी शहर या राज्य को विकसित करने के लिए बिजली आपूर्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। निर्बाध रूप से कोयला की आपूर्ति होना एक बड़ी समस्या बन रही थी। रेलवे ने इससे विशेष रूप से अलग रेलवे ट्रैक का निर्माण कर झारखंड-बिहार के कोयला खदानों से जोड़ने की कवायद की है।
इधर, गुरुवार को संरक्षा आयुक्त पूर्वी सर्किल कोलकाता के सुवोमोय मित्रा ने सोननगर-पतरातू तीसरी लाइन परियोजना का मोटर ट्रॉली से निरीक्षण किया। इसके बाद स्पीड ट्रायल सफलतापूर्ण संपन्न हुआ। पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि 291 किमी लंबे सोननगर-पतरातू तीसरी लाइन परियोजना 2015-16 के बजट मे 4500 सौ करोड़ की लागत से स्वीकृत की गयी थी। जोकि बिहार के औरंगाबाद, झारखंड के रामगढ, हजारीबाग, गढ़वा, पलामू औ लातेहार जिलों से होकर गुजरती है।
सीआरएस की स्वीकृति के बाद परियोजना नवी नगर रोड और टंडवा स्थित सुपर थर्मल पॉवर प्लांटों से सीधे देश भर के किसी भी राज्य में कोयला की आपूर्ति की दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। रेलवे सोन नगर में कोडरमा जंक्शन के रास्ते डीएफसी लाइन के साथ विलय के लिए फीडर मार्ग के रूप में भी काम करेगी।