टीम एबीएन, कोडरमा। दलित शोषण मुक्ति मंच (डीएसएमएम) के देशव्यापी आह्वान पर देश में दलित उत्पीड़न एवं संविधान पर हो रहे हमले के खिलाफ मंगलवार को मांग दिवस के तहत डीएसएमएम के जिलाध्यक्ष दिनेश रविदास के नेतृत्व में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। जिसके माध्यम से कहा गया कि वर्ष-2014 में जब से केन्द्र मे भाजपा की मोदी सरकार आई है तब से दलितों-पिछडों के उपर व्यापक हमले बढ़े हैं।
ससमय सजा नहीं मिलने के कारण अपराधियों में कानून का भय समाप्त हो गया है। मोदी सरकार नयी शिक्षा नीति लाकर दलितों, पिछडों एवं गरीबों को पढने से वंचित रखने का प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार सार्वजनिक संस्थाओं का निजीकरण कर दलितों, पिछडों एवं गरीबों का आरक्षण समाप्त कर रही है।
1980 में बने वन संरक्षण कानून में केंद्र सरकार ने संशोधन कर दिया है और अब वन भूमि का दोहन करने के लिए वन संरक्षण का जिम्मा पूंजीपतियों के हांथों में सौपने की साजिश की जा रही है। जिसे हम वापस लिया जाना चाहिए। 2006 में बने वन अधिकार अधिनियम भी ठीक से लागू नहीं हो रहा है, जिसके तरह वन भूमि पर वर्षों से बसे आदिवासी, दलित और अन्य गरीबों को जमीन पट्टा देना है। इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।
केंद्र सरकार बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर द्वारा निर्मित संविधान से छेड़छाड़ कर आर एस एस द्वारा निर्मित मनुवादी संविधान को लागू करने की योजना बना रही है, जो देश के सभी समुदायों, वर्गों के भविष्य के लिए बुरा है।
स्थानीय मांगों में कोडरमा एंव झुमरीतिलैया मे बाबा साहेब अम्बेडकर की पूर्व से लगी मूर्ति को बदलकर आदमकद प्रतिमा लगाने, सौन्दर्यीकरण करने, जमीन का आनलाईन रिकार्ड मे हुई गडबड़ी को शिविर लगाकर सुधार करने, बंदोवस्त भूमि पर दलितों को कब्जा दिलाया दिलाने, झुमरीतिलैया के बजरंग नगर एवं अंबेडकर नगर मे तीन पुश्त से बसे हुए दलितों को विकास के नाम पर उजाड़ने की तैयारी पर रोक लगाने, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के पीड़ित परिवारों को सरकार के द्वारा मिलने वाली सहायता राशि का भुगतान करने आदि मांगें शामिल हैं।
प्रतिनिधिमंडल में दलित शोषण मुक्ति मंच के जिलाध्यक्ष दिनेश रविदास, कोषाध्यक्ष राहुल कुमार, भीखारी तुरी, संतोष पासवान, संजय दास, टेकलाल दास, शिवपूजन पासवान, अर्जुन पासवान आदि शामिल थे।