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झारखंड

विकासशील भारत ने विकसित देशों से भी बड़ी उपलब्धि हासिल की

विकासशील भारत ने विकसित देशों से भी बड़ी उपलब्धि हासिल की
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रांची (सुनीता सिंह)। भारत ने 21 अक्टूबर 2021 को पूरी दुनिया में इतिहास रच दिया। भारत ने इस दिन 100 करोड़ से अधिक का कोरोना - टीकाकरण का लक्ष्य हासिल कर पूरी दुनिया के सामने एक मिसाल पेश की है। यह एक ऐसी मिसाल है, जिसे पूरा विश्व महामारी काल में भारत की एक और महान उपलब्धि के रूप में देख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को आगे बढ़ाने की जबर्दस्त मुहिम और कोशिश चलाई जा रही थी और देश निरंतर प्रगति की ओर आगे बढ़ा जा रहा था। इसी बीच इस कोशिश में एक विकराल बाधा के रूप में कोरोना महामारी दुनिया और देश के समक्ष सामने आया ।इस महामारी के समक्ष पूरी दुनिया एक तरफ बेबस दिखाई दे रही थी, तो दूसरी तरफ देश का पूरा विपक्ष इसे मोदी सरकार के खिलाफ एक राजनीतिक अवसर के रूप में देख रही थी। ऐसे कठिन समय में नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में इस विकराल आपदा और कठिन चुनौती को दृढ़ संकल्प तथा ठोस रणनीति के तहत न सिर्फ पार ही किया, बल्कि इतनी बड़ी आपदा को अवसर में बदल कर पूरी दुनिया के सामने अद्भुत उपलब्धि पेश किया। दुनिया के इस सबसे बड़े टीकाकरण अभियान की शुरुआत भारत में इसी साल 16 जनवरी को हुई थी और 9 महीनों यानी सिर्फ 279 दिनों में 135 करोड़ आबादी वाले भारत में 100 करोड़ वैक्सीन डोज का कठिन लक्ष्य हासिल कर लिया गया। इसमें 75% वयस्क आबादी को टीके की एक खुराक और 30% आबादी को दोनों खुराक मिली ।103.5 करोड़ से अधिक टीके की खुराक राज्यों को दी गई।98.15% कोरोना से स्वस्थ होने की दर रही। 85 दिनों में प्रथम 10 करोड़ डोज और अंतिम 10 करोड़ का लक्ष्य 19 दिनों में पूरा हुआ। इसमें 71 करोड लोगों को एक टीका और करीब करीब 30 करोड़ लोगों को दोनों टीके लग चुके हैं। वैसे तो आंकड़ों के नंबर के खेल में फिलहाल चीन पहले नंबर पर और भारत दूसरे नंबर पर है। लेकिन जैसे चीन की वैक्सीन की विश्वसनीयता पर लोगों को शक है। वैसे ही उसके टीकाकरण के आंकड़ों को लेकर भी हैं। वर्तमान में भारत, यूरोप, अमेरिका, ब्राजील, जापान, जर्मनी, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली जैसे तमाम देशों से आगे हैं। शुरुआती चरणों के अप्रैल और मई (2021) के टीकाकरण में भारत सबसे आगे था। 17 सितंबर को सर्वाधिक 2.52 करोड़ टीका लगाई गई। आइए प्रमुख देशों के टीकाकरण पर एक नजर डालते हैं : भारत 100 करोड़, अमेरिका 40.9 करोड़, ब्राजील 25.9 करोड़, इंडोनेशिया 17.3 करोड़, जापान 18.2 करोड़, जर्मनी 11 करोड, फ्रांस 9.74 करोड़, रूस 9.59 करोड़, यूनाइटेड किंगडम 9.49 करोड़, पाकिस्तान 9.36 करोड़ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया में अकेले ऐसे नेता हैं, जिन्होंने इस पूरे कैंपन को फ्रंट से लीड किया। उन्होंने अपने संबोधन के माध्यम से लोगों से संपर्क बनाकर रखा। जनता को संबल दिया। कोरोना की पहली लहर के दौरान ही कोरोना को लेकर19 मार्च से 20 अक्टूबर 2020 तक देश की जनता को सात बार संबोधित कर चुके थे। प्रधानमंत्री जी ने इस दौरान नारे दिए जैसे जान भी जहान भी, 2 गज की दूरी मास्क है जरूरी, जब तक दवाई नहीं तब तक ढिलाई नहीं और दवाई भी कड़ाई भी।इन नारों का जनता पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना की दूसरी लहर में 20 अप्रैल 21 को आठवीं बार देश की जनता को सम्बोधित किया। अप्रैल का यह महीना काफी खतरनाक था, लेकिन युद्ध स्तर पर ऐसे कदम उठाए गए कि 15 दिनों के भीतर ही स्थितियां नियंत्रण में आने लगी। इस संकट में मोदी जी देश के संकटमोचक बनकर उभरे। रातों-रात विश्व के कई देशों से ऑक्सीजन के अनेक टैंक और वेंटिलेटर हवाई मार्ग से मंगाए गए। तीव्र गति से नए गैस प्लांट लगाए गए। रुके प्लांट में तुरंत ऑक्सीजन उत्पादन शुरू कराया गया। ये सब किसी चमत्कार से कम नहीं था। ऐसे प्रयास से देश ऑक्सीजन संकट ही नहीं कोरोना संकट से भी काफी दूर हो गया। कोरोना लहर के भारत आगमन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता कर्फ्यू की घोषणा कर कोरोना के विरुद्ध बड़ा अभियान छेड़ दिया था और उनकी एक आवाज पर भारत एकजुट हो गया, जबकि विपक्ष जनता कर्फ्यू को विफल करने में पूरी ताकत झोंक दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना महामारी के गंभीर संकट को समझते हुए मार्च 2020 में ही इसकी रोकथाम और बचाव की कमान अपने हाथ में लेकर एक के बाद एक कारगर कदम उठाए। प्रधानमंत्री को देश की जनता सहित पूरी दुनिया ने सराहा, लेकिन देश के विपक्ष को मोदी जी की लोकप्रियता बर्दाश्त नहीं थी। वह लगातार घटिया राजनीति और शर्मनाक बातें करती रही और देश की जनता को मोदी जी के खिलाफ भड़काती रही। चाहे जनता कर्फ्यू, थाली पीटना, लॉकडाउन लगाना और जल्द टीका तैयार करने का मामला हो, विरोध के सिवा इनके पास कोई काम नहीं था। लेकिन एक अरब वैक्सीन का डोज लगना इस बात का प्रमाण है कि लोगों ने विपक्ष को नकारा और पीएम की बातें सुनी। और सबसे बड़ी बात है कि भारत में कोरोना को हराने में विश्व के मुकाबले तीव्र गति से चल रहे टीकाकरण और इसकी सफलता ने अंतरराष्ट्रीय जगत में खुलकर मोदी जी की प्रशंसा की और बधाई संदेश दिए। विश्व बैंक के अध्यक्ष, संयुक्त राष्ट्र, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्रशंसा की और प्रशंसा हो भी क्यों न? प्रधानमंत्री जी ने असंभव को संभव कर के जो दिखाया। कोरोना की पहली लहर आयी तब देश में मास्क, सेनिटाइजर, पीपीई किट्स और वेंटिलेटर जैसी सभी वस्तुओं का जबर्दस्त अभाव था, लेकिन प्रधानमंत्री जी ने आत्मनिर्भर भारत का जो मूल मंत्र दिया, उससे देश की दिशा और दशा दोनों बदल गई। कुछ ही दिनों के बाद भारत में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जरूरत की सभी वस्तुओं का इतने बड़े पैमाने पर निर्माण शुरू हुआ कि विदेशों पर हमारी निर्भरता नहीं रही ।इधर देश के गरीबों को मुफ्त राशन दिया गया और दूसरी तरफ उद्योगों की सहायता के लिए 20 लाख करोड रुपया़ का पैकेज देकर देश की अर्थव्यवस्था को भी संभाले रखा। प्रधानमंत्री मोदी जी के प्रयास से पहली बार ऐसा हुआ कि भारत में कम समय में दो-दो टीका का निर्माण कर लिया गया। हमारे देश में न केवल मुफ्त टीके लग रहे हैं। बल्कि अर्थव्यवस्था भी पटरी पर लौट आई है। 100 करोड़ का वैक्सीन डोज विश्व को भी प्रेरित करता है कि भारत ने अपनी विशाल जनसंख्या और सीमित साधनों के बावजूद इतना सब करके दिखा दिया। बकौल प्रधानमंत्री 100 करोड़ वैक्सीन डोज केवल एक आंकड़ा नहीं, ये देश के सामर्थ्य का प्रतिबिंब है। हाल में संपन्न जी-20 देशों की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भरोसा दिलाया कि भारत अगले वर्ष तक 500 करोड़ वैक्सीन डोज का उत्पादन करने के लिए तैयार है, जिसका एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों को दिया जाएगा। हर देशवासी को अपने प्रधानमंत्री के इन महान कार्यों पर दूरदर्शिता पर गर्व होना चाहिए है। (लेखिका भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की सदस्य हैं।)
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