- मामला सेवा संपुष्टि और अनावश्यक स्पष्टीकरण पूछे जाने का
- जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
टीम एबीएन, कोडरमा। सेवा संपुष्टि, अनावश्यक रूप से परेशान करने और अनावश्यक स्पष्टीकरण पूछे जाने के मामले को लेकर शिक्षक शनिवार को डीईओ आफिस के सामने धरना पर बैठ गए। इसके पूर्व कोडरमा माध्यमिक शिक्षक संघ ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को एक ज्ञापन भी सौंपा।
जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंपे गये ज्ञापन में कहा गया है कि नियुक्ति के समय से ही कोडरमा माध्यमिक शिक्षक संघ समस्याओं से त्रस्त रहा है। सुप्रीम कोर्ट से जंग लड़ कर जब शिक्षक उबरे हैं तो कोडरमा जिला शिक्षा कार्यालय का सौतेला रवैया अभी भी बरकरार है।
सेवा संपुष्टि, बकाया वेतन भुगतान आदि समस्या पर संघ द्वारा बार-बार ज्ञापन देने के बाद भी उसका निराकरण नहीं हो सका है। यदि समस्याओं का समाधान त्वरित गति से नहीं हुआ तो माध्यमिक शिक्षक प्रदर्शन करने के लिए सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे। ज्ञापन में कहा गया है कि 2019 बैच के नियुक्त माध्यमिक शिक्षकों की सेवा संपुष्टि नहीं हो सकी है।
2019 बैच के नियुक्त माध्यमिक शिक्षकों जिनकी सेवा संपुष्टि 3 साल हो गई है उनका जिला कार्यालय के निष्क्रियता के कारण सेवा संपुष्टि लंबित है। इतिहास और नागरिक विषय के शिक्षकों के बकाया वेतन का भुगतान नहीं हो सका है। इनका 3 माह का बकाया वेतन लंबित है। मानवता को ध्यान में रखते हुए अविलंब इसका भुगतान किया जाए।
जिले के लगभग विद्यालयों में प्रधानाध्यापक का पद रिक्त है। प्रभारी प्रधानाध्यापक द्वारा विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। इससे संबंधित कोई भी प्रशिक्षण उन्हें प्राप्त नहीं है, जिससे स्पष्ट हो कि उनका कार्य दायित्व क्या-क्या है। सेवा पुस्तिका का संधारण प्रभारी प्रधानाध्यापक से कराने की परंपरा पहले से चली आ रही है।
2015 बैच के सभी शिक्षकों की सेवा संपुष्टि का संधारण व संपुष्टि हेतु गोपनीय प्रतिवेदन तत्कालीन कार्यरत प्रधानाध्यापकों के द्वारा ही संधारित किया गया है। ज्ञापन की प्रतिलिपि कोडरमा डीसी को भी सौंपी गयी है।
ज्ञापन में जिलाध्यक्ष राधेश्याम शुक्ला, शशि शेखर, विनोद कुमार, सुनील यादव, अजय कुमार, हारून रशीद आलम, श्याम सुंदर यादव, वीरेंद्र कुमार यादव, शंकर पासवान, विनोद शर्मा, पी कुमार रविदास समेत लगभग 22 शिक्षकों के हस्ताक्षर हैं। ज्ञापन पर विचार नहीं किके4 जाने के विरोध में शिक्षक डी ई ओ कार्यालय के समक्ष घंटों तक धरना पर बैठे रहे।