- महाराष्ट्र के नागपुर में केंद्रीय खनन मंत्री प्रहलाद जोशी और सचिव विवेक भारद्वाज ने किया सम्मानित
- हिंडालको के माइंस हेड बीके झा ने पुरस्कार ग्रहण किया
- झारखंड में सर्वोत्तम टिकाऊ खनन और प्रथाओं को हिंडालको देती है महत्व : झा
टीम एबीएन, लोहरदगा। देश की अग्रणी बॉक्साइट कंपनी बिरला समूह के हिंडालको माइन्स डिविजन लोहरदगा झारखंड को स्थाई विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए भारत सरकार ने फाइव स्टार अवार्ड से सम्मानित किया है। हिंडाल्को माइंस डिवीजन ने खदानों में सर्वोत्तम टिकाऊ खनन प्रथाओं को बरकरार रखने के लिए पांच स्टार पुरस्कार प्राप्त किया है।
भारत के खान कोयला और संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के सम्मान समारोह में झारखंड के लोहरदगा में स्थित हिंडालको माइन्स डिवीजन के चार बॉक्साइट माइंस को फाइव स्टार आवार्ड से सम्मानित किया है।
हिंडालको के जिन माइंसों को नागपुर में वह से नवाजा गया, उनमें हिंडाल्को (झारखंड) के अमतीपानी, भापलीमाली, भुसाड (बगडू) और सामरी बाक्साइट माइंस शामिल है। सम्मान समारोह में विशेष रूप से भारत के खान सचिव विवेक भारद्वाज और इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस (आईबीएम) के महानियंत्रक उपस्थित हुए।
हिंडालको के माइन्स हेड (इंडिया) बिजेश कुमार झा ने केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी और सचिव विवेक भारद्वाज से लोहरदगा बगडू हिल बॉक्साइट माइन्स के निकट स्थित भुषाड माइंस के लिए यह सम्मान हासिल किया। उन्होंने कहा कि झारखंड में हिंडालको सर्वोत्तम टिकाऊ और खनन प्रथाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए माइनिंग करती है।
मौके पर खनन मंत्रालय और आईबीएम के अधिकारियों ने कहा कि पृथ्वी के गर्भ से धातुओं, अयस्कों, औद्योगिक और अन्य उपयोगी खनिजों को बाहर निकालना या माइनिंग हैं। आधुनिक युग में खनिजों तथा धातुओं की खपत इतनी अधिक हो गयी है कि प्रति वर्ष उनकी आवश्यकता करोड़ों टन की होती है। इस खपत की पूर्ति के लिए बड़ी-बड़ी खानों की आवश्यकता का उत्तरोत्तर अनुभव हुआ। फलस्वरूप खनिकर्म ने विस्तृत इंजीनियरों का रूप धारण कर लिया है। इसको खनन इंजीनियरी कहते हैं।
सरलीकृत विश्व खनन मानचित्र संसार के अनेक देशों में, जिनमें भारत भी एक है। माइनिंग बहुत प्राचीन समय से ही प्रचलित है। प्राचीन युग में धातुओं तथा अन्य खनिजों की खपत बहुत कम थी, इसलिए छोटी-छोटी खान ही पर्याप्त थी। उस समय ये खानें 100 फुट की गहराई से अधिक नहीं जाती थीं। जहां पानी निकल आया करता था, वहां नीचे खनन करना असंभव हो जाता था। धरातल पर ऊपर-ऊपर से खुदाई की जाये तो उसे उत्खनन क्वारी कहते हैं। बॉक्साइट खदान में इसी पद्धति का उपयोग किया जाता है। भू-गर्भ से खनिज प्राप्त किये जायें, तो उस कार्य को खनन कहते हैं।