टीम एबीएन, कोडरमा। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिये गये निर्णय का मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने स्वागत किया है। माकपा के राज्य सचिवमंडल सदस्य संजय पासवान ने कहा कि गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश की तीन सदस्यीय समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा की जायेगी।
उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि अगर नेता प्रतिपक्ष मौजूद नहीं हैं, तो लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को समिति में लिया जायेगा। यह प्रथा तब तक लागू रहेगी जब तक कि इस संबंध में संसद द्वारा कानून नहीं बना दिया जाता। संविधान के अनुच्छेद 324 में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का अधिकार दिया है। यह चुनाव आयोग के स्वतंत्र प्राधिकरण और कामकाज को मजबूत करने की दिशा में एक साकारात्मक कदम है।
संविधान पीठ ने अपने फैसले में यह भी कहा कि चुनाव आयोग को कार्यपालिका के सभी प्रकार के अधीनता से अलग रहना होगा।
माकपा हमेशा से इस बात की वकालत करता रहा है कि चुनाव आयोग की नियुक्ति संसद द्वारा हो। सीबीआई निदेशक, लोकपाल आदि की नियुक्ति के संबंध में पारदर्शी और लोकतांत्रिक तरीके से की जानी चाहिए।