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धूमधाम से मनायी गयी रामकृष्ण परमहंस की 187वीं जयंती

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धूमधाम से मनायी गयी रामकृष्ण परमहंस की 187वीं जयंती
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टीम एबीएन, झुमरी तिलैया। झारखंड बंगाली समिति कोडरमा शाखा के तत्वावधान में शहर के अड्डी बंगला स्थित रवींद्र भवन में पूजा अर्चना के साथ रामकृष्ण परमहंस की 187 वीं जयंती संपन्न हुई। समिति के अध्यक्ष डॉक्टर ओमियो विश्वास ने बताया कि सभी धर्मों की एकता पर जोर देने वाले आध्यात्मिक गुरु रामकृष्ण परमहंस एक महान संत, दार्शनिक, साधक एवं विचारक थे। 

रामकृष्ण परमहंस का जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल प्रांत स्थित कामारपुकुर ग्राम में हुआ था। बचपन से ही रामकृष्ण परमहंस को विश्वास था कि ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं और इसके लिए उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन ईश्वर की भक्ति और  कठोर साधना में बिताया। समिति के वरिष्ठ सदस्य दासरथी बनर्जी ने कहा की  रामकृष्ण परमहंस सभी धर्मों को समान रूप से देखते थे एवं कहते थे सभी धर्म समान है। 

छत पर पहुंचने के लिए आप पत्थर की सीढ़ियों से, लकड़ी की सीढ़ियों से, बांस की सीढ़ियों से या रस्सी से पहुंच सकते हैं, आप बांस के खंभे से भी चढ़ सकते हैं।ह्व महत्वपूर्ण बात  है कि छत पर चढ़ना उसी तरह ईश्वर को पाने के लिए अलग-अलग रास्ते हो सकते हैं लेकिन लक्ष्य वहां तक पहुंचने का है। जोतो मत ततो पथ यानी जितने विचार उतने रास्ते को रामकृष्ण परमहंस मानते थे काफी सरलता के साथ अपनी कठिन बातों को लोगों के बीच देने वाले देश के इस महान संत का जन्म जयंती एवं पूजा अर्चना विधि विधान से की गयी।

 पूजा सामंतों काली मंदिर के पुजारी अरिंदम बनर्जी, विमल चटर्जी व अनूप मुखर्जी के द्वारा किया गया। पूजा के बाद भक्तजनों के बीच भोग प्रसाद का वितरण किया गया। कार्यक्रम में अशोक दास गुप्ता, सुधान्य घोष, उत्तम दास पाल, आलोक सरकार, संदीप मुखर्जी, गौतम पाल, सपन डे, इंद्रानी पंडित, सोमा सरकार, बनानी घोष, बालका दासगुप्ता, चंद्रानी सरकार, विभूति चक्रवर्ती, जयंत मजूमदार, भ्रमर राय, बुद्धेश्वर कुंडू, सुनील देबनाथ, तारक नाथ दत्ता के अलावे दर्जनों लोग उपस्थित थे।

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